भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: निवेशकों की चिंताएं बढ़ीं
newzfatafat January 12, 2026 07:42 PM

मुंबई: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों की उम्मीदों को निराश किया। जबकि जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग जैसे एशियाई बाजारों में मजबूती देखी गई, भारतीय बाजार ने खुलते ही भारी दबाव का सामना किया। सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती गिरावट ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि जब वैश्विक संकेत सकारात्मक थे, तो घरेलू बाजार में यह गिरावट क्यों आई।


सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत

सोमवार को बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 83,576.24 के मुकाबले कमजोर स्थिति में खुला। कुछ ही मिनटों में यह 525 अंकों से अधिक गिरकर 83,043 के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी भी 25,683.30 के पिछले बंद से गिरकर खुला और शुरुआती कारोबार में 150 अंकों से अधिक नीचे चला गया। इस अचानक गिरावट ने बाजार में घबराहट पैदा कर दी।


एशियाई बाजारों में मजबूती

भारतीय बाजार के विपरीत, एशियाई शेयर बाजारों में सोमवार को मजबूती देखी गई। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंगसेंग सभी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। निवेशकों को वहां से सकारात्मक संकेत मिल रहे थे, जिससे यह उम्मीद थी कि भारतीय बाजार भी इसी रुख में खुलेंगे, लेकिन स्थिति बिल्कुल अलग थी।


भारतीय बाजार पर दबाव के कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय बाजार पर घरेलू कारणों का अधिक प्रभाव पड़ा। मुनाफावसूली, कुछ प्रमुख शेयरों में बिकवाली और निवेशकों की सतर्कता ने शुरुआती कारोबार में दबाव डाला। इसके अलावा, हालिया तेजी के बाद कई निवेशक जोखिम कम करना चाहते थे, जिसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ा।


निवेशकों की चिंता और बाजार का मूड

तेज गिरावट के बाद छोटे और मझोले निवेशकों में चिंता स्पष्ट रूप से देखी गई। शुरुआती झटके ने बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर किया और कई सेक्टर्स में बिकवाली बढ़ गई। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह गिरावट घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की स्थिति है, क्योंकि दिन के कारोबार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।


आगे बाजार की दिशा

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा निर्धारित करेंगे। यदि निवेशकों का भरोसा लौटता है, तो गिरावट से उबरने की संभावना है। फिलहाल, बाजार पर नजर बनाए रखना और जल्दबाजी से बचना निवेशकों के लिए एक बेहतर रणनीति मानी जा रही है।


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