भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने निशानेबाजी कोचिंग स्टाफ के एक प्रमुख सदस्य अंकुश भारद्वाज को निलंबित कर दिया है। एक नाबालिग निशानेबाज ने अंकुश भारद्वाज पर उन पर पिछले महीने राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। एनआरएआई ने पुष्टि की है कि फरीदाबाद में अंकुश भारद्वाज के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई है।
अंकुश भारद्वाज पर पॉस्को कानून के तहत केसमोहाली निवासी अंकुश भारद्वाज पर पॉस्को अधिनियम की धारा छह (गंभीर यौन उत्पीड़न) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2) (धमकी देने से संबंधित) के तहत मामला दर्ज किया गया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने एनआरएआई के सचिव राजीव भाटिया के हवाले से लिखा, ‘एनआरएआई ने उन्हें निलंबित कर दिया है और हम उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे।’
खुद को निर्दोष साबित करें अंकुश: राजीवराजीव भाटिया ने कहा, ‘उन्हें नैतिक आधार पर निलंबित किया गया है। अब उन्हें खुद को निर्दोष साबित करना होगा। जांच पूरी होने तक वह किसी भी तरह की कोचिंग गतिविधि से नहीं जुड़े रहेंगे।’ राजीव भाटिया ने कहा कि एनआरएआई ने 2024 में पेरिस ओलंपिक के बाद 37 सदस्यीय कोचिंग टीम में भारद्वाज को स्थान देने की सिफारिश की थी।
राजीव भाटिया ने कहा, ‘एनआरएआई की सिफारिश पर ही भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने उन्हें कोच नियुक्त किया था। यह सूरजकुंड में हुई यौन उत्पीड़न की घटना है।’ इस बीच खेल मंत्रालय ने कथित अपराध का संज्ञान लेते हुए कहा, ‘सभी हितधारकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो युवा खिलाड़ी कोच और संबंधित प्रणालियों पर भरोसा करते हैं, उन्हें इस तरह की स्थिति का सामना न करना पड़े।’
अभ्यास सत्र के दौरान का है मामलापीड़िता ने जो एफआईआर दर्ज की है, उसके अनुसार, पिछले महीने करणी सिंह रेंज में एक अभ्यास सत्र के बाद यह घटना घटी थी। पिछले साल अगस्त से अंकुश भारद्वाज के साथ प्रशिक्षण ले रही इस युवा निशानेबाज ने बताया कि वह इस घटना से सदमे में है और उन्होंने बार-बार पूछे जाने पर एक जनवरी को अपनी मां को इसकी जानकारी दी।
17 वर्षीय खिलाड़ी ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया है कि अंकुश भारद्वाज उसे मोहाली, पटियाला, देहरादून औरजैसे स्थानों पर प्रशिक्षण के लिए बुलाते थे, लेकिन वह हमेशा उसी दिन घर लौट आती थी। पीड़िता ने कहा कि घटना वाले दिन वहचैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए टैक्सी से अकेले ही करणी सिंह रेंज गई थी।
घर जाने की जगह होटल बुला लियाउन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के बाद जब वह घर जा रही थी, तो कोच ने उसे प्रदर्शन का विश्लेषण करने के लिए रुकने को कहा। कोच ने पहले उसे फरीदाबाद के सूरजकुंड इलाके में एक होटल की लॉबी में मिलने के लिए कहा, लेकिन वहां पहुंचने पर कोच ने कथित तौर पर उसे अपने कमरे में आने के लिए मजबूर किया और कहा कि उसके प्रदर्शन को लेकर अधिक गहन चर्चा करने की जरूरत है।
पीड़ित खिलाड़ी ने बताया, ‘कोच ने मुझे लिफ्ट वाले एरिया में आने को कहा। जब मैं लिफ्ट वाले एरिया में गई तो कोच ने मुझसे कहा कि उन्होंने यहां एक कमरा बुक किया है, इसलिए मेरे कमरे में आ जाओ। मैं तुमसे वहां खेल के बारे में बात करूंगा। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। वह मुझे तीसरी मंजिल पर एक कमरे में ले गए और मैच के बारे में चर्चा की।’
विरोध करने पर धमकी दी: पीड़ितापीड़िता ने एफआईआर में फिजियोथेरेपी तकनीक का जिक्र करते हुए बताया, ‘मैंने कुछ देर बाद सर से कहा कि मैं घर जाना चाहती हूं, लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि वह मेरी पीठ की हड्डी चटका (एक तरह का व्यायाम) देंगे। मैंने तुरंत इनकार कर दिया लेकिन इसके बावजूद सर ने मुझे जबरदस्ती पेट के बल लिटाया और मेरा यौन उत्पीड़न किया। जब मैंने विरोध किया तो उन्होंने मुझे धमकी दी।’
पीड़िता ने बताया, ‘कोच ने मुझे धमकी दी कि मैं इस घटना के बारे में किसी को नहीं बताऊं वरना वह मेरे पेशेवर करियर को बर्बाद कर देगा। इस घटना के बाद मैं बहुत डर गई और मैंने किसी को कुछ नहीं बताया।’ इस खिलाड़ी ने बताया कि घटना के बाद उनके व्यवहार में बदलाव देखकर जब उसकी मां ने बार-बार उससे पूछा, तब जाकर उसने आखिरकार सब कुछ बताया।
2010 में डोपिंग के कारण झेल चुके हैं बैनएक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। पूर्व पिस्टल निशानेबाज अंकुश भारद्वाज को अपने करियर के दौरान बीटा-ब्लॉकर के इस्तेमाल के लिए 2010 में डोपिंग प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था। निशानेबाजी, तीरंदाजी और बिलियर्ड्स के खिलाड़ियों के लिए बीटा-ब्लॉकर प्रतिबंधित हैं, क्योंकि यह हृदय गति, मांसपेशियों में कंपन और चिंता को कम करने में मदद करते हैं।