मुंबई की सबसे बड़ी सार्वजनिक लोहड़ी: 4 बंगला गुरुद्वारा में 24 साल की परंपरा, संस्कृति और एकता का भव्य उत्सव
APN News January 15, 2026 12:42 AM

मुंबई की तेज़ रफ्तार जिंदगी के बीच जब पंजाबी लोक-संस्कृति की गर्माहट महसूस करनी हो, तो अंधेरी स्थित गुरुद्वारा 4 बंगला इसका सबसे जीवंत उदाहरण बनकर सामने आता है। इस वर्ष यहां लोहड़ी का 24वां सार्वजनिक आयोजन श्रद्धा, उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ, जिसमें 2,000 से अधिक लोग शामिल हुए। अलग-अलग समुदायों की भागीदारी ने इस आयोजन को मुंबई की सबसे बड़ी सार्वजनिक लोहड़ी के रूप में स्थापित कर दिया।

इस अनूठी परंपरा की नींव वर्ष 2002 में सरदार सिंह सूरी ने रखी थी, जो उस समय गुरुद्वारा 4 बंगला के अध्यक्ष थे। उनका सपना था कि मुंबई में रहने वाला पंजाबी समुदाय, जो अपने घरों से दूर है, उसे एक ऐसा सांस्कृतिक मंच मिले जहां वे अपनी परंपराओं को न सिर्फ जी सकें, बल्कि अगली पीढ़ी तक भी पहुंचा सकें। उनके लिए यह आयोजन “घर से दूर एक घर” जैसा था—जहां आग के चारों ओर बैठकर लोग आपसी अपनत्व और सांस्कृतिक जड़ों को महसूस कर सकें।

आज इस सांस्कृतिक विरासत को उनके पुत्र सरदार जसपाल सिंह सूरी पूरे समर्पण और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। उनके नेतृत्व में यह आयोजन हर साल और अधिक भव्य होता गया है, लेकिन इसकी आत्मा—समानता, सेवा और सामूहिकता—ज्यों की त्यों बनी हुई है।

गुरुद्वारे के पीछे स्थित खुले मैदान में आयोजित इस समारोह में जाति, धर्म और भाषा की सीमाएं स्वतः ही मिटती नजर आईं। सिख परंपरा के अनुसार सभी के लिए समान रूप से प्रसाद और लंगर की व्यवस्था की गई। लोहड़ी के पारंपरिक प्रसाद रेवड़ी और गज्जक के साथ-साथ ब्रेड पकौड़ा, जलेबी, पुलाव और दूध ने आयोजन के स्वाद को और भी खास बना दिया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही पवित्र लोहड़ी अग्नि, जिसके चारों ओर श्रद्धालुओं ने परिक्रमा कर कृतज्ञता और नई शुरुआत की कामना की। आतिशबाज़ी और पंजाबी लोक-संगीत पर झूमता भांगड़ा माहौल में ऊर्जा भरता रहा। प्रसिद्ध कलाकार जग्गी संधू की विशेष प्रस्तुति ने उत्सव को नई ऊंचाई दी, जबकि आयोजन की व्यवस्थाओं में सरदार मनिंदर सिंह सूरी की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही।

इस अवसर पर सरदार जसपाल सिंह सूरी ने कहा, “लोहड़ी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि कृतज्ञता, एकता और आशा का प्रतीक है। यह सर्दियों के अंत और नई फसल के स्वागत का उत्सव है। मेरे पिता ने मुंबई जैसे महानगर में हमारी परंपराओं को जीवित रखने के लिए इस आयोजन की शुरुआत की थी, और आज हजारों लोगों को एक साथ देखना उसी सोच की सफलता है।”

24 वर्षों की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि अगर सामूहिक प्रयास और समर्पण हो, तो परंपराएं किसी भी शहर में जड़ें जमा सकती हैं। गुरुद्वारा 4 बंगला की यह लोहड़ी आज सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मुंबई की सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा बन चुकी है।

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.