New Delhi, 22 जनवरी . Supreme Court ने Political रैलियों और सभाओं में भीड़ प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश या एसओपी जारी करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है.
कोर्ट ने कहा कि भगदड़ जैसी घटनाएं बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण होती हैं. लेकिन, इस तरह के मामलों में व्यापक निर्देश या मानक संचालन प्रक्रिया जारी करना अदालत का काम नहीं है.
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि Political रैलियों, यात्राओं या सार्वजनिक कार्यक्रमों में भीड़ नियंत्रण के लिए विस्तृत दिशानिर्देश बनाना Government, चुनाव आयोग और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी है.
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे अपनी मांगों को केंद्र Government, संबंधित राज्य Governmentों और सक्षम विभागों के सामने रखें. सक्षम प्राधिकारी इस मुद्दे पर विचार करके उचित कदम उठा सकते हैं.
Supreme Court ने यह भी कहा कि Political आयोजनों में भीड़ प्रबंधन को लेकर एकसमान और व्यापक निर्देश जारी करना संभव नहीं है, क्योंकि हर कार्यक्रम की परिस्थितियां, स्थान, मौसम और अन्य कारक अलग-अलग होते हैं. ऐसे में स्थानीय प्रशासन और आयोजकों को ही जिम्मेदारी निभानी चाहिए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए.
कोर्ट ने जोर दिया कि अदालतें नीतिगत फैसले नहीं ले सकतीं, बल्कि केवल कानूनी व्याख्या और आवश्यक हस्तक्षेप करती हैं.
यह याचिका हाल की कुछ भगदड़ घटनाओं के बाद दायर की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी. याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि Supreme Court Political रैलियों में भीड़ को नियंत्रित करने, आपातकालीन निकास, Police की तैनाती, अग्निशमन व्यवस्था और अन्य सुरक्षा उपायों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करे.
हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता की इस मांग को खारिज कर दिया. इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यह कार्यकारी क्षेत्र में आता है और अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती.
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एसएचके/एबीएम