लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सकों ने एक जटिल सर्जरी के माध्यम से 12 वर्षीय बालिका को जीवनदान दिया, जिसके पास दो बच्चेदानी और दो योनि थीं।
चिकित्सकों के अनुसार, इस बच्ची को जन्म से ही पेशाब पर नियंत्रण नहीं था और शौच का मार्ग भी ठीक से विकसित नहीं हुआ था। यूरोलाजी विभाग के विशेषज्ञों ने इस सर्जरी को तीन चरणों में पूरा किया। यह दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में इस तरह की जटिल सर्जरी पहली बार की गई है।
यूरोलाजी विभाग के प्रमुख प्रो. ईश्वर राम दयाल ने बताया कि बलिया की इस बच्ची को जन्म से ही पेशाब पर नियंत्रण की समस्या थी, जिसके कारण उसे हमेशा डायपर पहनना पड़ता था। इसके अलावा, उसे पेट साफ करने में भी कठिनाई हो रही थी, जिससे उसका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था और मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था।
स्थानीय चिकित्सकों से उपचार कराने के बाद भी बच्ची को राहत नहीं मिली। किसी की सलाह पर वह यूरोलाजी विभाग की ओपीडी में आई। लक्षणों के आधार पर उसकी रेडियोलाजी और पैथोलाजी जांचें की गईं। रिपोर्ट देखकर सभी चिकित्सक हैरान रह गए।
प्रो. ने बताया कि बच्ची को एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी थी, जिसमें उसकी बच्चेदानी की संरचना असामान्य थी। उसके पास तीन यूट्रस और दो योनि थीं, और पेशाब की नलिकाएं गलत स्थान पर खुली हुई थीं। सर्जरी के पहले चरण में गुदा मार्ग से जुड़ी समस्या को ठीक किया गया, जबकि दूसरे चरण में पेशाब नियंत्रण के लिए सर्जरी की गई।