USS अब्राहम लिंकन पहुंचा, मिसाइलें तैयार…क्या ईरान पर वार करने वाले हैं ट्रंप?
Uma Shankar January 24, 2026 08:23 PM

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. मिडिल ईस्ट में अमेरिकी जंगी जहाजों की बढ़ती मौजूदगी, फाइटर जेट्स की तैनाती और ईरान की खुली धमकियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि सीधे सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ रहे हैं.

वॉल स्ट्रीट जर्नल और रॉयटर्स की रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ ऐसे सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिनका असर निर्णायक हो. इसी बीच अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन का मिडिल ईस्ट की ओर तेजी से बढ़ना हालात को और गंभीर बना रहा है.

मिडिल ईस्ट में बढ़ती अमेरिकी सैन्य हलचल

USS अब्राहम लिंकन, जो पहले साउथ चाइना सी में तैनात था, अब अरब सागर होते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड के ऑपरेशन जोन में पहुंच चुका है. इसके साथ कई डिस्ट्रॉयर जहाज और न्यूक्लियर पनडुब्बियां भी मौजूद हैं. इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर दर्जनों F/A-18 फाइटर जेट तैनात हैं, जिनकी स्ट्राइक रेंज ईरान के कई शहरों तक मानी जा रही है.

इतना ही नहीं, जॉर्डन में भी अमेरिकी वायुसेना ने F-15 फाइटर जेट्स और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं. हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया बेस पर लगातार कार्गो विमानों की आवाजाही यह संकेत दे रही है कि अमेरिका किसी बड़े ऑपरेशन की तैयारी में है.

ट्रंप के पास ईरान को लेकर कौन-कौन से विकल्प?

1. प्रतीकात्मक हमला: ट्रंप ईरान के परमाणु या मिसाइल ठिकानों पर सीमित हमले का आदेश दे सकते हैं. ऐसा हमला ज्यादा नुकसान नहीं करेगा, लेकिन यह दिखाने के लिए काफी होगा कि अमेरिका अपनी चेतावनियों पर अमल करता है.

2. सुरक्षा तंत्र पर सीधा वार: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC), पुलिस और अर्धसैनिक बलों से जुड़े ठिकाने अमेरिका के निशाने पर हो सकते हैं. इसमें साइबर अटैक भी शामिल हैं, जिससे ईरानी सुरक्षा ढांचे को कमजोर किया जा सके.

3. आर्थिक ठिकानों को नुकसान: अमेरिका ईरान के तेल निर्यात टर्मिनल्स और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है. इससे ईरान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा, लेकिन इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजारों पर भी पड़ सकता है.

4. सत्ता के शीर्ष पर वार: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को हटाने का विकल्प सबसे बड़ा और सबसे जोखिम भरा कदम होगा. ऐसा होने पर ईरान में सत्ता का खालीपन पैदा हो सकता है, जिसके नतीजे पूरी तरह अनिश्चित होंगे. ईरान के विदेश मंत्री भी चेतावनी दे चुके हैं कि खामेनेई पर हमले को जंग माना जाएगा.

5. बिना हथियारों की कार्रवाई: अमेरिका गैर-सैन्य कदम भी उठा सकता है, जैसे ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को अंतरराष्ट्रीय समर्थन, कूटनीतिक दबाव और नई पाबंदियां. हालांकि, इनका असर तुरंत और निर्णायक होने की संभावना कम है.

ईरान ने भी दी खुली चेतावनी

अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के जवाब में ईरान ने साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है. ईरानी सैन्य नेतृत्व का कहना है कि मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और इजरायल दोनों उसकी मिसाइलों की जद में हैं. ईरान की सेना पूरी तरह अलर्ट पर है और किसी भी हमले का जवाब देने को तैयार है.

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