बालाघाट: PM जनमन स्कीम में बनी थी देश की पहली सड़क, पर भूले पुल बनाना; कीचड़ बना आदिवासियों के लिए मुसीबत
TV9 Bharatvarsh January 25, 2026 02:43 PM

एमपी का बालाघाट नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा, जहां प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत देश की पहली सड़क जिले के आदिवासी बाहुल्य परसवाड़ा क्षेत्र में 2024 को बनकर तैयार हुई. इस योजना के तहत बनने वाली यह देश की पहली सड़क थी, लिहाजा चंद दिनों तक अखबारों की सुर्खियों में भी छाई रही, लेकिन वास्तविकता यह है कि उस सड़क पर पुल भी बनना था, जो अभी तक नहीं बना, जिसका खामियाजा वहां के निवासियों बैगा समाज के लोगों को भुगतना पड़ रहा है.

पीएम जनमन योजना के तहत देश की पहली सड़क बनने पर प्रशासनिक अमले ने भी खूब अपनी पीठ थपथपाई कि विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों तक पक्की सड़क तो पहुंच गई. अब आसानी से विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के लोग अस्पताल, राशन दुकान सहित अन्य जगहों पर बिना किसी परेशानी के पंहुच सकेंगे.

यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन सड़क निर्माण कार्य पूरा होते ही महज कुछ दिनों तक शासन स्तर पर वाहवाही के दौर के बाद जिम्मेदारों ने इस तरफ से ऐसे मुंह फेर लिया, मानों यहां अब उनकी कोई जिम्मेदारी बाकी नहीं रही हो, जिम्मेदारों की इसी उदासीनता का दंश आज भी यहां के लोगों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है.

पुल के इंतजार में आदिवासी

दरअसल, देश की पहली जनमन सड़क का तमगा लेकर आज भी यह सड़क इस रास्ते में पड़ने वाले पुलों के निर्माण की बाट जोह रही है. सड़क विगत 16 मार्च 2024 को बनकर तैयार हो गई, लेकिन उसके बाद से अब तक रास्ते पर पड़ने वाले नालों पर पुल बनाने की दिशा में काम नहीं किया गया. जिस कारण यहां से होकर गुजरने वाले बैगा आदिवासियों को आज भी पुल के अभाव में आवागमन में परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं.

बारिश के दिनों में बाधित हो जाता है आवागमन

पुल का निर्माण नहीं होने से बारिश के दिनों में चार महिनों के लिए ग्राम पंडाटोला और डण्डईझोला के लोगों के लिए आवागमन बाधित हो जाता है. हालांकि ग्रामीणों की माने तो उन्होंने इसको लेकर कई बार शासन- प्रशासन का ध्यान आकर्षण कराया लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए है, जिसको लेकर इन आदिवासी बैगा समुदाय के लोगों में स्थानीय प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है.

बर्षो से हो रही पुल निर्माण की मांग

जिले के आदिवासी बाहुल्य परसवाड़ा तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत नाटा के गांव नीमटोला और पंडाटोला के बीच स्थित नाले पर पुल और पंडाटोला से डण्डईझोला के बीच नाले पर पुल के निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन सरकार का शायद इस ओर ध्यान ही नहीं है, जबकि बारिश के दौरान यहां पर लोगों को जोखिम भरा सफर तय करना पड़ता है.

बारिश में गांव बन जाता है टापू

ग्रामीणों की मानें तो बारिश के दौरान ग्राम डण्डईझोला पूरी तरह टापू बन जाता है. यहां से न तो बच्चे स्कूल जा पाते हैं और न बीमारी में कोई अस्पताल जा पाता है. ऐसे में कई बार जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करना ग्रामीणों की मजबूरी बन जाती है.

बैगा आदिवासी के आंखों में मायूसी

ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण को लेकर कई बार पंचायत स्तर से प्रस्ताव भेजे गए हैं. साथ ही जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन सौंपा गया. इसके अलावा अधिकारियों से भी कई बार अनुरोध किया गया, लेकिन अभी तक पुल निर्माण को लेकर किसी तरह की कार्यवाही नहीं हुई, जिससे यहां के बैगा आदिवासी मायूसी भरी नजर से टकटकी लगाए शासन प्रशासन की ओर देख रहें हैं कि कब उनका इस ओर ध्यान आकर्षित होगा और कब उन्हें इस जोखिम भरे सफर से निजात मिलेगी.

बारिश होते ही बंद हो जाता है रास्त

सरपंच कुंवरसिंह मेरावी का कहना है कि हमारे ग्राम पंचायत अंतर्गत आने वाले ग्राम पंडाटोला और डंडाईझोला के लोगों को पुल के अभाव में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सड़क तो बढ़िया बना दी गई है, लेकिन पुल नही होने के कारण बारिश में बहुत ज्यादा परेशानियां होती हैं.

स्कूली बच्चे उफनते नाले को पार नहीं कर सकते और स्कूल से वंचित हो जाते हैं. बीमार व्यक्ति, गर्भवती माताएं और बुजुर्गों के लिए तो बहुत ज्यादा परेशानी होती है. खासकर बारिश के समय लोग ग्राम पंचायत तक नही पहुंच पाते. कई बार शासन- प्रशासन का ध्यान आकर्षण कराया गया, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला.

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