क्या साउथ और नॉर्थ के बीच की दूरी सिर्फ एक मिथक है? विवेक रंजन अग्निहोत्री का नजरिया
Stressbuster Hindi January 28, 2026 04:42 AM
सिनेमा की सीमाओं को तोड़ने की कोशिश

मुंबई, 27 जनवरी। वर्तमान में, नॉर्थ के दर्शक साउथ की फिल्मों का आनंद ले रहे हैं, जबकि साउथ के सिनेमा प्रेमी नॉर्थ की कहानियों में रुचि दिखा रहे हैं। इसके बावजूद, सिनेमा पर भाषा और क्षेत्र की सीमाओं का आरोप लंबे समय से लगाया जाता रहा है। इस संदर्भ में, फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री ने इस दूरी को नकारते हुए कहा कि फिल्मों की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है, न कि उनकी भाषा।


हाल के वर्षों में, कई साउथ की फिल्में हिंदी में डब या रीमेक होकर नॉर्थ में सफल रही हैं। विवेक ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फिल्मों का भाषा से कोई संबंध नहीं होता और एक अच्छी फिल्म हर जगह सफल होती है। उन्होंने इसे मीडिया और कुछ कैंपेन का परिणाम बताया, जिसने नॉर्थ-साउथ के बीच विवाद को बढ़ाया।


विवेक ने कहा, "मेरे लिए साउथ, ईस्ट, वेस्ट, और नॉर्थ के बीच कोई दूरी नहीं है। फिल्में सभी जगह देखी जाती हैं। हम हॉलीवुड और कोरियन फिल्में भी देखते हैं। अच्छी फिल्म का भाषा से कोई लेना-देना नहीं है। मैं मराठी से लेकर मलयालम फिल्मों तक का आनंद लेता हूं। नॉर्थ और साउथ के बीच की दूरी एक मीडिया-निर्मित धारणा है, और मैं इससे असहमत हूं।"


उन्होंने यह भी बताया, "अगर साउथ की फिल्में इतनी विशिष्ट हैं कि नॉर्थ में नहीं चल सकतीं, तो फिर आधे से ज्यादा हिंदी फिल्में साउथ की कहानियों पर आधारित क्यों हैं? यह दर्शाता है कि अच्छी कहानी कहीं से भी आ सकती है।"


अपनी हालिया फिल्म 'द बंगाल फाइल्स' का उदाहरण देते हुए विवेक ने कहा, "हमें इन दूरियों को खत्म करने का प्रयास करना चाहिए। मैं हमेशा 'इंडियन सिनेमा' की बात करता हूं। मैं अपनी फिल्मों को नॉर्थ या साउथ के नजरिए से नहीं देखता। मेरी फिल्म 'द बंगाल फाइल्स' भारत के विभाजन पर आधारित है, जो कि पूरे देश का मुद्दा है।"


विवेक ने दर्शकों और फिल्म निर्माताओं से अपील की कि बिना वजह नॉर्थ-साउथ का विवाद न बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा, "फिल्में लोगों को जोड़ने का कार्य करती हैं, तोड़ने का नहीं। मेरी स्पष्ट राय है कि एक अच्छी कहानी, बेहतरीन निर्देशन और सच्ची भावना वाली फिल्म किसी भी भाषा या क्षेत्र की सीमाओं में नहीं बंधती।"


© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.