नेहा ने बातचीत में कहा कि इन नियमों का मुख्य उद्देश्य समाज में समानता को बढ़ावा देना है। यदि कानून का उद्देश्य भेदभाव और अपमान से बचाना है, तो इसमें क्या समस्या है? उन्होंने कहा, "मैं स्वयं सवर्ण हूं, लेकिन मेरे मन में कोई बुराई नहीं है। जब चोरी के खिलाफ कानून बनता है, तो चोर ही डरता है।"
गायिका ने आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट के विरोध का उदाहरण देते हुए कहा कि जब आरक्षण लागू हुआ था, तब भी इसका विरोध हुआ था। आज भी एससी-एसटी एक्ट का विरोध हो रहा है, लेकिन इन कानूनों ने लाखों लोगों को भेदभाव से बचाया है। समाज में बदलाव के समय कुछ लोग खुश होते हैं, जबकि कुछ नाराज।
नेहा ने आगे कहा, "हमें जाति व्यवस्था से ऊपर उठकर उदार होना चाहिए और विचारों को खुला रखना चाहिए। यदि कोई विरोध कर रहा है, तो वे या तो इस्तीफा दे रहे हैं या फिर प्रदर्शन कर रहे हैं। संविधान ने सभी को अधिकार दिए हैं, और वे अपने अधिकार का उपयोग कर सकते हैं।"
उन्होंने सिलेक्टिव अप्रोच पर भी सवाल उठाया। नेहा ने कहा, "हम संविधान की समानता की बात करते हैं, लेकिन जब उर्दू में कुछ होता है, तो चुप रहते हैं। कुछ लोग अतार्किक बातें करते हैं, लेकिन यह कानून समाज और देश के लिए फायदेमंद है।"
इसके साथ ही, नेहा ने शंकराचार्य के विवाद पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, "संतों का मान होना चाहिए। गलती होने पर माफी मांग लेना चाहिए। कोई भी इंसान गलती कर सकता है। सरकार कह रही है कि यह विरोधी पार्टी का एजेंडा है, लेकिन मुझे नहीं पता यह किसका एजेंडा है। मुख्य मुद्दे पर चर्चा नहीं हो रही है।"