आयुर्वेदिक चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य बिना दवाओं, जटिल सर्जरी या दर्दनाक प्रक्रियाओं के लोगों को लंबे समय तक स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने में सहायता करना है। संस्कृत में, आयुर्वेद का अर्थ है 'जीवन का ज्ञान' या 'जीवन का विज्ञान'।
भारत में, लोग सदियों से पाचन संबंधी समस्याओं से लेकर बांझपन तक के लिए पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचारों पर निर्भर रहे हैं। हाल के वर्षों में, जब से वैकल्पिक स्वास्थ्य पद्धतियाँ विश्वभर में लोकप्रिय हुई हैं, आयुर्वेद ने एक नई पहचान बनाई है और आज भी प्रभावी साबित हो रहा है।
आयुर्वेद एक प्राचीन प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है, जिसकी उम्र लगभग 5,000 वर्ष है। यह पहली बार भारत की वैदिक संस्कृति में प्रकट हुआ और इसे कई लोग सबसे पुराना चिकित्सा विज्ञान मानते हैं।
आयुर्वेदिक चिकित्सा का आधार तीन दोषों: वात, पित्त और कफ पर है। यह मान्यता है कि रोग और बीमारियाँ इन तीन ऊर्जाओं के असंतुलन और प्रकृति से अलगाव के कारण उत्पन्न होती हैं। आपके शरीर का आयुर्वेदिक प्रकार आपके शारीरिक ढांचे, चयापचय, पाचन और अन्य कारकों पर निर्भर करता है।
मैरीलैंड मेडिकल सेंटर की 2015 की रिपोर्ट के अनुसार, आयुर्वेदिक चिकित्सा और सही आयुर्वेदिक आहार सूजन, हार्मोनल, पाचन और स्व-प्रतिरक्षित स्थितियों के उपचार में सहायक हो सकता है।