सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर रोक लगा दी है. 29 जनवरी 2026 को CJI सूर्यकांत ने रोक लगाते हुए कहा कि इन नियमों का गलत इस्तेमाल हो सकता है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को दोबारा ड्राफ्ट बनाने के निर्देश दिए. याचिकाकर्ताओं के वकील विनीत जिंदल ने फैसला आने के बाद खुशी जाहिर करते हुए कहा, 'CJI सूर्यकांत ने हमारी दलीलों की तारीफ की है.'
CJI सूर्यकांत ने दलीलों को सही ठहराया: जिंदल
नवीन जिंदल ने कहा कि यह हमारे लिए बहुत बड़ी जीत है. जैसा कि हम तीन मुद्दों पर बात कर रहे थे. इसमें एक है सेक्शन 3C, जो जातिगत भेदभाव के बारे में बात कर रहा है और उस खास सेक्शन में जनरल कैटेगरी को बाहर रखा गया है, जबकि बाकी जातियों को शामिल किया गया है. यह सेक्शन खास मैसेज दे रहा है कि SC,ST और OBC के साथ जनरल जाति ने भेदभाव किया है, जबकि ऐसा नहीं है.'
नवीन जिंदल ने कहा, 'CJI सूर्यकांत ने हमारी दलील की तारीफ की. उन्होंने खासतौर पर कहा कि हम जो कह रहे हैं वह सही है और अगर ऐसी धाराएं हैं, तो यह निश्चित रूप से जनरल जाति के लिए बहुत सख्त और भेदभावपूर्ण होगा. इसमें बदलाव किया जाना चाहिए.'
CJI सूर्यकांत ने खास कमेटी बनाने का सुझाव दिया: जिंदल
इसमें इक्विटी कमेटी के बारे में भी जिक्र है, जो इन नए UGC नियमों के सेक्शन 18 के तहत बनाई गई है. इन खास नियमों में जनरल कम्युनिटी के लिए कोई खास रिप्रेजेंटेशन नहीं दिया गया है. CJI ने भी हमारी इस दलील को माना और सुझाव दिया कि एक खास कमेटी बनाई जानी चाहिए जिसमें जानकारी रखने वाले एकेडेमिक्स और सोशल वर्कर शामिल हों.
UGC के नए नियमों पर बवाल क्यों हुआ?
UGC के नए कानून का नाम प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशंस 2026 है. इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव रोकने के लिए कई निर्देश दिए गए थे. नए नियमों में कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का निर्देश दिया गया. ये टीमें SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी. लेकिन सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि UGC ने जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी. नए नियमों में वह ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं.