आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई पूरी, SC ने सुरक्षित रखा फैसला, हफ्तेभर के अंदर वकीलों से मांगी दलीलें
एबीपी लाइव डेस्क January 29, 2026 08:12 PM

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 जनवरी, 2026) को आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है. आवारा कुत्तों के मामले में पहले दिए गए अपने आदेशों में संशोधन का अनुरोध करने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था. 

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. गौरव अग्रवाल ने बेंच के सामने पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों की ओर से उठाए गए कदमों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया.

पूीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भी 7 नवंबर, 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन पर अपनी दलीलें पेश कीं. इस आदेश में कोर्ट ने एनएचएआई को नेशनल हाईवेज से आवारा पशुओं को हटाने और सड़कों के किनारे बाड़ लगाने के निर्देश दिए थे. कोर्ट ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) को शेल्टर होम या पशु जन्म नियंत्रण सुविधाओं के लिए अनुमति मांगने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के आवेदनों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने एडब्ल्यूबीआई के वकील से कहा, 'चाहे आप आवेदन को स्वीकार करें या अस्वीकार करें, लेकिन जो भी करना है वो जल्दी करें.'  सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी वकील की इस दलील पर की, जिसमें उन्होंने कहा कि सात नवंबर के आदेश के बाद, विभिन्न संगठनों से ऐसे आवेदनों में अचानक वृद्धि हुई है.

कोर्ट ने संबंधित पक्षों से मामले में यथाशीघ्र अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा. कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकारों की ओर से आवारा कुत्तों की नसबंदी की दर बढ़ाने के निर्देशों का पालन न करने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, 'वे सभी हवाई किले बना रहे हैं.'

कोर्ट सात नवंबर, 2025 के उस आदेश में संशोधन का अनुरोध करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें अधिकारियों को संस्थागत क्षेत्रों और सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था. कोर्ट ने 13 जनवरी को कहा था कि वह राज्यों से कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए भारी हर्जाना देने को कहेगा और ऐसे मामलों के लिए कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराएगा. कोर्ट ने पिछले पांच सालों से आवारा पशुओं से संबंधित मानदंडों के लागू न होने पर भी चिंता जताई.

 

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