जबलपुर: स्कूल में छात्राओं की टी-शर्ट उतरवाने पर मचा बवाल, प्रिंसिपल ने दी सफाई, बोले- इरादा गलत नहीं था
TV9 Bharatvarsh February 01, 2026 01:47 AM

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में स्थित केंद्रीय विद्यालय सिवनी में परीक्षा के दौरान छात्र-छात्राओं के साथ कथित रूप से अमर्यादित व्यवहार का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. नकल जांच के नाम पर छात्राओं की यूनिफॉर्म टी-शर्ट उतरवाने के आरोप लगने के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है. बुधवार को नाराज अभिभावक बड़ी संख्या में स्कूल परिसर पहुंचे और विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया.

जानकारी के अनुसार, 29 जनवरी को कक्षा 12वीं के छात्र-छात्राएं प्रायोगिक परीक्षा के बाद स्कूल यूनिफॉर्म की टी-शर्ट पहनकर विद्यालय पहुंचे थे. इन टी-शर्ट्स पर छात्रों ने स्मृति स्वरूप कुछ शब्द और चिन्ह बनाए थे जिनमें लड़का-लड़की – आई लव यू दिल के निशान और कुछ नेताओं के नाम लिखे हुए थे. विद्यालय प्रबंधन ने इसे अनुशासनहीनता बताते हुए आपत्ति जताई.

टी-शर्ट उतरवाने पर अभिभावकों में गुस्सा

आरोप है कि इसके बाद परीक्षा के दौरान छात्रों से टी-शर्ट बदलने के लिए कहा गया. जब परिजन दूसरी टी-शर्ट लेकर समय पर नहीं पहुंचे, तो लगभग 20 विद्यार्थियों से कथित तौर पर टी-शर्ट उतरवाकर उन्हें जैकेट पहनाकर घर भेज दिया गया. इस घटना की जानकारी मिलते ही अभिभावकों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने इसे बच्चों के मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है. अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों को पांच अंक काटने की धमकी भी दी गई, जिससे छात्र-छात्राओं में भय और तनाव का माहौल बन गया. उनका कहना है कि टी-शर्ट पर लिखी बातें न तो अश्लील थीं और न ही किसी तरह से आपत्तिजनक, फिर भी बच्चों के साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया.

जिला कलेक्टर से की शिकायत

शुक्रवार को अभिभावकों ने पूरे मामले की शिकायत जिला कलेक्टर श्रीमती शीतला पटले से की. शिकायत मिलते ही कलेक्टर ने तत्काल जांच के आदेश देते हुए एक चार सदस्यीय जांच दल का गठन किया. जांच दल में एसडीएम सिवनी पर्वी तिवारी, डीपीसी महेश बघेल, महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी मनोज लारोकर तथा सुधारालय अधीक्षक बाल अभिजीत पचौरी को शामिल किया गया. जांच टीम ने 30 जनवरी को विद्यालय पहुंचकर जांच प्रारंभ कर दी है.

वहीं पूरे मामले में सिवनी कलेक्टर शीतला पटले का कहना है कि केंद्रीय विद्यालय में हमें सूचना प्राप्त हुई है कि कुछ बच्चों के टी-शर्ट बदलने (एक्सचेंज होने) को लेकर, स्क्रिब्लिंग के समय शिक्षकों द्वारा कुछ कार्रवाई की गई है. उस कार्रवाई को लेकर शिकायतें सामने आई हैं और कुछ मुद्दे भी सुनने में आए हैं. इस पूरे मामले की जांच के लिए हमने एक टीम गठित कर दी हैं और एसडीएम मैडम को विद्यालय भेजा जा रहा है. वहां से जो भी वास्तविक स्थिति सामने आएगी, उसके अनुरूप आवश्यक सुधार किया जाएगा और यदि कार्रवाई की आवश्यकता होगी तो नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी.

प्रिंसिपल ने क्या कहा?

वहीं अपनी सफाई में केंद्रीय विद्यालय सिवनी के प्राचार्य दीपक साहू का कहना है कि प्रैक्टिकल के बाद बच्चे अपनी टी-शर्ट्स पर ऐसी बातें लिख रहे थे, जो नहीं लिखी जानी चाहिए थीं. इससे स्कूल यूनिफॉर्म की मर्यादा प्रभावित हो रही थी, जबकि बच्चों को स्कूल की यूनिफॉर्म का सम्मान करना चाहिए. जो बातें टी-शर्ट्स पर लिखी जा रही थीं. उनसे यूनिफॉर्म की गरिमा नहीं बनी रहती थी. यदि बच्चे ऐसी टी-शर्ट्स पहनकर स्कूल के बाहर जाते, तो इससे स्कूल की छवि धूमिल होती और स्कूल की बेइज्जती होती.

इसी कारण जब यह देखा गया तो बच्चों को रोका गया. उन्हें कहा गया कि वे अपने पैरेंट्स को कॉल करें और दूसरी टी-शर्ट मंगवाकर पहनें. कुछ बच्चों ने बताया कि उनके पैरेंट्स उस समय उपलब्ध नहीं थे और फोन नहीं उठा पा रहे थे. ऐसे में बच्चों ने कहा कि उनके पास जैकेट्स हैं, वे जैकेट पहनकर जा सकते हैं. इसके बाद बच्चे टी-शर्ट्स वहीं छोड़कर जैकेट पहनकर घर चले गए. करीब पंद्रह-बीस बच्चे थे, जिनमें छात्र और छात्राएं दोनों शामिल थीं.

क्या है मामला?

प्राचार्य का कहना है कि उद्देश्य यही था कि पैरेंट्स को जानकारी मिले और वे टी-शर्ट्स लेकर आएं, ताकि बच्चे दूसरी टी-शर्ट पहनकर जा सकें. बच्चे बारहवीं कक्षा के हैं, यह समझा जा सकता है, लेकिन स्कूल की बेइज्जती नहीं होनी चाहिए. इस तरह की टी-शर्ट्स पहनकर बाहर जाने से स्कूल और स्कूल यूनिफॉर्म की गरिमा प्रभावित होती है. बच्चों से निवेदन है कि आज सोशल मीडिया से वे कई चीजें सीख रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने स्कूल और स्कूल यूनिफॉर्म का सम्मान करना सीखना चाहिए.

गौरतलब है कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और केन्द्रीय विद्यालय संगठन के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि परीक्षा के दौरान तलाशी या जांच मर्यादित, गोपनीय और लिंग-संवेदनशील तरीके से की जाए. किसी भी परिस्थिति में विद्यार्थियों के कपड़े उतरवाने की अनुमति नहीं है. इसके बावजूद यह घटना नियमों की अनदेखी का उदाहरण बनकर सामने आई है. फिलहाल जिला प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही है. अब सभी की नजरें जांच निष्कर्ष और जिम्मेदारों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं.

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