मछली पालने के लिए बनाना है अमृत सरोवर, जानें सरकार कैसे देगी कारोबार शुरू करने के लिए पैसा?
एबीपी लाइव February 01, 2026 05:12 PM

Amrit Sarovar: सरकार देश के ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही है. जिससे लोगों को रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर न आना पड़े. गांव के लोग अब मछली पालन को भी एक बड़े मौके के तौर पर देखते हैं. इसके जरिए कमाई के नए रास्ते से निकल रहे हैं. इसी को देखते हुए सरकार ने अमृत सरोवर योजना शुरू की थी.

इस योजना से अब फिश फार्मिंग जैसे बिजनेस को खड़ा किया जा सकता है. सरकार चाहती है कि गांव के युवा और किसान कम जमीन, कम लागत और लोकल संसाधनों के सहारे अपनी बिजनेश शुरू करें. इसलिए तालाबों को इस तरह डेवलप किया जा रहा है कि वह मछली पालन के लिए इस्तेमाल किया जा सके. जान लीजिए इस योजना में कैसे मिलेगा फायदा और किन चीजों की होगी जरूरत.

क्या है अमृत सरोवर योजना?

मिशन अमृत सरोवर जल संरक्षण और किसानों की इनकम बढ़ाने वाली पहल है. केंद्र सरकार ने इसके तहत देशभर में 50 हजार तालाब बनाने करने का टारदेट रखा है. देश में पानी की कमी को देखते हुए यह कदम उठाया गया. जिससे बारिश का पानी संरक्षित हो और गांवों में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहे. 

इन तालाबों का इस्तेमाल किसान सिंचाई के साथ मछली पालन में कर सकें. इसके साथ ही पानी से खेती जैसे इनकम के नए मौके बनें. इस योजना मकसद है कि पानी का सही उपयोग हो और उसी संसाधन से किसानों को स्थायी कमाई का मौका मिले.

फिश फार्मिंग के लिए कैसे काम करेगी अमृत सरोवर योजना?

अमृत सरोवर के तहत बने तालाबों को साइंटिफिक तरीके से तैयार किया जाता है. जिससे वह फिश फार्मिंग के लिए परफेक्ट हों. पानी की गहराई, सफाई, वाॅटप फ्लो और सेफ्टी इन पहलुओं पर काम होता है. इसके बाद जो लोग यह काम करना चाहचे हैं मत्स्य विभाग उन लोगों को ट्रेनिंग देता है. इसमें मछली बीज सिलेक्ट करना, फीड मैनेजमेंट, पानी की क्वालिटी और बीमारी से बचाव सिखाया जाता है.

कई गांवों में ग्रुप बनाकर सामूहिक मछली पालन कराया जाता है. जिससे रिस्क कम और प्रोडक्शन ज्यादा हो. इससे छोटे किसान, ऐसे परिवार जिनके पास जमीन नहीं है और बेरोजगार युवा बिना बड़े इन्वेस्टमेंट के कमाई का एक स्थायी जरिया बना सकते हैं.

सरकार दे रही है आर्थिक मदद

फिश फार्मिंग शुरू करने वालों के लिए सरकार कई स्तर पर मदद देती है. तालाब बनाने या उस सही करने के लिए सब्सिडी देती है. मछली बीज, चारा और जरूरी टूल्स खरीदने के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाती है. बैंक लोन पर ब्याज में राहत और आसान लोन ऑप्शन भी मिल जाते हैं. कई राज्यों में इसे खेती से जुड़ा काम मानकर स्पेशल ग्रांट दिया जाता है.

 इसके साथ बाजार में ले जाने के लिए सुविधा, स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट सपोर्ट भी मिलता जाता है. योजना का मकसद है कि प्रोडक्शन से लेकर बिक्री तक गांव के लोगों के लोगों के किसी तरह की असुविधा और परेशानी का सामना न करना पड़े. अगर आप भी फिश फार्मिंग करना चाहते हैं तो फिर यह योजना है बेस्ट है.

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