क्या है नया इनकम टैक्स एक्ट 2025? जानें टैक्स स्लैब से लेकर जुर्माने तक सब कुछ
Webdunia Hindi February 01, 2026 07:43 PM


New Income Tax Act 2025 India: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हालांकि इनकम टैक्स पर आम आदमी को कोई राहत नहीं दी है, लेकिन 1 अप्रैल 2026 से भारत में आयकर अधिनियम, 2025 (Income Tax Act, 2025) लागू होने जा रहा है। यह नया कानून 60 साल से भी पुराने आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेगा। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स नियमों को सरल बनाना और आम जनता के लिए इसे समझना आसान बनाना है। क्या कहा वित्त मंत्री ने?

वित्त मंत्री ने बजट भाषण में नए इनकम टैक्स एक्ट को इसी साल से लागू करने की बात कही है। वित्त मंत्री सीतारमण ने टैक्स फॉर्म को आसान करने की बात कही है। इसमें करदाता दंड की जगह टैक्स देकर छूट सकते हैं। बजट में मुकदमेबाजी को कम करने के लिए कदम उठाया गया है। इसके साथ ही अघोषित आय एक करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है।

Tax Year का नया कॉन्सेप्ट

अभी तक हम 'प्रीवियस ईयर' (कमाई का साल) और 'असेसमेंट ईयर' (टैक्स भरने का साल) के फेर में उलझे रहते थे। 1 अप्रैल 2026 से इन दोनों को हटाकर सिर्फ 'Tax Year' शब्द का इस्तेमाल होगा। जिस साल आप पैसा कमाएंगे, वही आपका टैक्स साल कहलाएगा। बजट 2025 में घोषित किए गए नए स्लैब अब पूरी तरह प्रभावी होंगे। नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत अब 12 लाख रुपए तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा (स्टैंडर्ड डिडक्शन और रिबेट मिलाकर)।

सरलीकरण और डिजिटल सुधार

पुराने कानून में 800 से ज्यादा धाराएं (Sections) थीं, जिन्हें घटाकर लगभग 536 कर दिया गया है। कानून की भाषा को सरल बनाया गया है ताकि टैक्सपेयर्स को कानूनी उलझनों का सामना न करना पड़े। नियमों को स्पष्ट करने से टैक्स विभाग और करदाताओं के बीच होने वाले मुकदमों में कमी आने की उम्मीद है।

बजट में टैक्स को लेकर अन्य प्रस्ताव
  • प्रमोटरों द्वारा बायबैक के अनुचित प्रयोग पर रोक लगाने के लिए बजट में सभी प्रकार के शेयरधारकों के लिए बायबैक पर पूंजीगत लाभ के रूप में कर लगाने का प्रस्ताव किया गया है। हालांकि कर विवाचन के दुरुपयोग को हतोत्साहित करने के लिए प्रमोटर्स अतिरिक्त बायबैक कर का भुगतान करेंगे। इससे कॉर्पोरेट प्रवर्तकों के लिए प्रभावी कराधान 22 प्रतिशत होगा। गैर-कॉर्पोरेट प्रवर्तकों के लिए यह कर 30 प्रतिशत होगा।
  • एल्कोहॉल युक्त लीकर, स्क्रैप और खनिजों के विक्रेताओं के लिए टीसीएस दरों को तर्कसंगत बनाते हुए 2 प्रतिशत किया जाएगा। तेंदु पत्तों पर इन दरों को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत किया जाएगा। उदारीकृत रेमिटेंस योजना के तहत 10 लाख रुपए से ज्यादा रकम के रेमिटेंस के लिए टीसीएस दर- (क) शिक्षा व इलाज हेतु रेमिटेंस के लिए 2 प्रतिशत (ख) शिक्षा अथवा इलाज के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए 20 प्रतिशत।
  • वायदा सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। ऑप्शन प्रीमियम और ऑप्शन कार्यकलाप पर एसटीटी को वर्तमान दर क्रमशः 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत किए जाने का प्रस्ताव है।
  • कंपनियों को नई व्यवस्था में स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु, कंपनियों को मैट-क्रेडिट को समयोजित करने की अनुमति केवल नई व्यवस्था में दिए जाने का प्रस्ताव है। नई व्यवस्था में उपलब्ध मैट-क्रेडिट का उपयोग करके समायोजन कर देयताओं के ¼ की सीमा तक की अनुमति दिए जाने का प्रस्ताव है।
  • 1 अप्रैल, 2026 से कोई और क्रेडिट संचय नहीं होगा और मैट को अंतिम कर बनाया जाएगा। इस परिवर्तन के अनुरूप 15 प्रतिशत की वर्तमान मैट दर को कम करके 14 प्रतिशत किया जाएगा। 31 मार्च 2026 तक संचित करदाताओं के आगे ले जाई गई मैट क्रेडिट, ऊपर दिए गए हिसाब से समयोजन के लिए उपलब्ध रहेंगे।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala

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