Union Budget 2026-27 : क्या इलेक्ट्रिक गाड़ियां होंगी सस्ती, निर्मला सीतारमण के बजट में ऑटो सेक्टर को क्या मिला
Webdunia Hindi February 01, 2026 08:43 PM

Union Budget 2026-27 News : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट से ऑटो सेक्टर को खासी उम्मीदें थीं। जानिए वित्त मंत्री ने ऑटो सेक्टर के लिए क्या बड़े ऐलान किए। सेमी कंडक्टर को लेरक बजट 2026 में बड़ा ऐलान किया गया। केंद्रीय मंत्री ने बजट में कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू किया जाएगा। सेमी कंडक्टर के लिए बजट में 40 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत सेमी कंडक्टर मिशन पर अपना फोकस बढ़ाएगा। इसके तहत घरेलू कैपिटल गुड्स क्षमताओं को बनाने और बढ़ाने के साथ ही इंडीपेंडेंट सप्लाई चेन बनाने पर फोकस किया जाएगा।

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क्या इलेक्ट्रिक गाड़ियां होंगी सस्ती

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैट्रियों के लिए लिथियम-आयन सेल विनिर्माण के लिए प्रयुक्त पूंजीगत वस्तुओं को दी जाने वाली मूल सीमा-शुल्क छूट को बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में लिथियम-आयन सेल विनिर्माण का उपयोग करने वाली पूंजीगत वस्तुओं तक विस्तृत करने का प्रस्ताव है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग की जाने वाली बैटरी की कीमत में अंतर आ सकता है। अगर इसकी कीमत कम हो जाएगी तो इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत भी कम हो सकती है।

सीएनजी के गिरेंगे दाम

निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में यह भी जानकारी दी है कि सीएनजी में बायोगैस मिलाए जाने को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, बजट में बायोगैस मिश्रित सीएनजी पर देय केन्द्रीय सीमा शुल्क की गणना करते समय बायोगैस के सम्पूर्ण मूल्य को बाहर रखने का प्रस्ताव किया गया है। सीएनजी और बायोगैस की कीमत कम हो जाएंगी तो इसका सीधा फायदा आम जनता के साथ वाहन निर्माताओं को भी मिलेगा।

मोटर एक्सीडेंट मुआवजे के ब्याज पर माफ होगा पूरा टैक्स

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डायरेक्ट टैक्स को लेकर बजट में बड़ी घोषणा की है। वित्त मंत्री ने मोटर वाहन एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (Motor Accident claims tribunal, MACT) में कंपनसेशन पर मिलने वाले इंटरेस्ट को करमुक्त करने की घोषणा की। वित्त मंत्री ने कहा कि मोटर दुर्घटना के मामलों में किसी व्यक्ति को मिलने वाले ब्याज की राशि को आयकर से पूरी तरह मुक्त (Exempt) कर दिया गया है।

मौजूदा नियमों के मुताबिक मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (एमएसीटी) द्वारा दिए गए ब्याज को टैक्स योग्य आय माना जाता था। अक्सर मुआवजा मिलने में देरी हो जाती है, जिससे ब्याज की रकम काफी बढ़ जाती है और पीड़ितों या उनके परिजनों को उस पर टैक्स देना पड़ता है। इस वजह से कई बार पीड़ितों को मुआवजे की पूरी रकम नहीं मिल पाती थी। उन्हें इलाज, पुनर्वास और रोज़ी-रोटी के लिए मिलने वाले पैसों में भी कमी झेलनी पड़ती थी। कई मामलों में टैक्स रिफंड की जटिल प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता था। Edited by : Sudhir Sharma

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