केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश का आम बजट संसद में पेश किया है. इस बजट को लेकर विपक्षी दल सरकार को घेरे हुए है. अब आम बजट को लेकर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने भी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने आज बजट पर सवाल भी उठाए हैं और इशारों-इशारों में सरकार पर तंज भी कसा है.
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि वैसे तो केन्द्र सरकार का बजट सत्ताधारी पार्टी की नीति व नीयत में चाल, चरित्र व चेहरे का आईना होता है, जिसमें यह झलक मिलती है कि सरकार की सोच वास्तव में गरीब व बहुजन-हितैषी होकर व्यापक देशहित की है. या फिर पूंजीवादी सोच की पोषक बड़े-बड़े पूंजीपति व धन्नासेठ समर्थक हैं. सरकार को इस पर भी बताना चाहिए कि यह बजट आम गरीब जनता को कितना राहत देगी. सर्वसमाज के हित में केवल बातें ना हो बल्कि इनपर सही नीयत से अमल भी जरूरी होना चाहिए.
बजट पर सही नीयत से अमल जरूरीमायावती ने कहा कि देश की संसद में आज केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए बजट में विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं, वादों और आश्वासनों के संबंध में भविष्य में इनके परिणामों को लेकर यही लगता है कि इनके नाम तो बड़े-बड़े हैं. लेकिन जमीनी स्तर पर इनके दर्शन छोटे ना हो तो बेहतर होगा. इसीलिए सर्वसमाज के हित में केवल बातें ना हो बल्कि इनपर सही नीयत से अमल भी जरूरी है.
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इतना ही नहीं खासकर अपने भारत देश के सन्दर्भ में इस बात का भी विशेष महत्व है कि सरकार की नीति दीर्घकाल में आत्मनिर्भरता की अगर है तो उसके लिए सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व देकर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कल्याणकारी संविधान के पवित्र मंशा के हिसाब से क्या कार्य किया गया है.
पिछले साल के बजट में किए वादे क्या हुए पूरे?मायावती ने सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले साल के बजट में सरकार द्वारा किए गए दावे, वादे और आशाएं क्या आज पूरी की गई है. या फिर एक रस्म को निभा कर रह गई है. उन्होंने कहा कि यह भी देखना जरूरी है कि क्या आम लोगों के जीवन में कोई वास्तविक बदलाव आया है.
देश के संसद में आज केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये बजट में विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं, वादों और आश्वासनों के सम्बन्ध में भविष्य में इनके परिणामों को लेकर यही लगता है कि इनके नाम तो बड़े-बड़े हैं, किन्तु जमीनी स्तर पर इनके दर्शन छोटे ना हो तो बेहतर होगा। इसीलिए सर्वसमाज के हित में
— Mayawati (@Mayawati)
उन्होंने कहा कि वास्तव में जीडीपी से अधिक लोगों के जीवन में बहु-अपेक्षित विकास व बहु-प्रतीक्षित गुणात्मक परिवर्तन है जो सीधे तौर पर व्यापक जनहित व देशहित से जुडे़ हैं. जिनका आकलन वर्तमान बजट की वाहवाही से पहले जरूर कर लेना है. सरकार भी इस पर कुछ रोशनी डाले तो यह लोगों के अच्छे दिन के लिए अच्छी बात है वरना यह जिम्मेदारी कौन निभाएगा.