नई दिल्ली। वोटरों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल याचिका पर पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की बेंच में तमाम दलीलें दीं, लेकिन उनको फिलहाल कुछ हासिल नहीं हो सका। ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वो पश्चिम बंगाल से हैं और एसआईआर के मामले को अच्छे से बता सकती हैं। ममता ने कहा कि वो सामान्य परिवार से हैं और इंसाफ नहीं मिल रहा।
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वो सामान्य व्यक्ति हैं और अपनी पार्टी के लिए नहीं लड़ रही हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार भी एसआईआर के मुद्दे पर कोर्ट आई है। कपिल सिब्बल और गोपाल सुब्रहमण्यम जैसे वकील उस पर बहस कर रहे हैं। इस पर ममता बनर्जी ने कहा कि जब वकील शुरू से लड़ रहे, रिकॉर्ड पर बार-बार बातें रखी जा रहीं, छह बार चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखी, लेकिन जवाब तक न मिला, तो महसूस होता ही है कि न्याय कहीं पिछले दरवाजे पर अटक गया है। उन्होंने 5 मिनट का वक्त मांगा, तो सीजेआई ने कहा कि 15 मिनट देंगे, लेकिन पहले हमारी बात सुनिए।
सीजेआई ने कहा कि हर समस्या का हल होता है और इसका भी निकालेंगे। आपकी सरकार और पार्टी यहां हैं। आपके पास देश के सबसे वरिष्ठ वकील हैं। हमने आपकी समस्याओं को स्वीकार किया है। इसके बाद ममता बनर्जी ने कहा कि पहले उनको बोलने और बात खत्म करने की इजाजत दी जाए। ममता ने कहा कि सभी बांग्ला अखबारों ने छापा है। जिसकी तस्वीर वो देना चाहती हैं। कोर्ट ने कहा कि वो इससे सहमत है कि ममता बनर्जी की ओर से उठाया गया मुद्दा वास्तविक है। कोर्ट ने कहा कि हम ये भी नहीं चाहते कि भाषा संबंधी दिक्कतों या नाम की वर्तनी में अंतर की वजह से किसी को वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया जाए।

ममता बनर्जी ने महिलाओं के ससुराल जाने और बीएलओ की मौत के उदाहरण दिए। साथ ही आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश नहीं मान रहा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल पर निशाना साधा जा रहा। ममता ने ये सवाल उठाया कि असम में भी विधानसभा चुनाव हैं, लेकिन वहां एसआईआर क्यों नहीं कराई जा रही। उन्होंने आधार कार्ड को एसआईआर के मान्य दस्तावेजों में शामिल करने की भी मांग की। इस पर सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा कि आधार के बारे में फैसला सुरक्षित कर चुके हैं।

ममता बनर्जी ने ये आरोप भी लगाया कि चुनाव आयोग सरकारी और राज्य का नागरिक होने का डोमिसाइल सर्टिफिकेट भी नहीं मान रहा। ममता ने कहा कि संविधान के उलट राज् में माइक्रो ऑब्जर्वर रखे गए। ममता बनर्जी ने कहा कि ये माइक्रो ऑब्जर्वर वोटर लिस्ट से लोगों के नाम काटने के लिए लगाए गए हैं। ममता ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के सभी ईआरओ से अधिकार छीन लिए हैं। उन्होंने कहा कि ये वाट्सएप आयोग है। ममता बनर्जी की इस दलील का चुनाव आयोग के वकील ने विरोध किया। चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि ममता बनर्जी का ये आरोप गलत है कि पश्चिम बंगाल सरकार से आयोग सहयोग नहीं कर रहा। इसके बाद सीजेआई की बेंच ने ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। इस मामले में अब सोमवार 9 जनवरी को सुनवाई होगी।
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