देवनीमोरी बुद्ध अवशेषों की प्रदर्शनी भारत-श्रीलंका के आध्यात्मिक संबंधों को करेगी उजागर
Indias News Hindi February 05, 2026 05:42 AM

New Delhi, 4 फरवरी . ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष Wednesday को भारतीय वायुसेना के सी-130जे विमान के जरिए श्रीलंका पहुंच गए.

यह अवसर India और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण क्षण माना जा रहा है. इन पवित्र अवशेषों के श्रीलंका पहुंचने पर वहां धार्मिक श्रद्धा और सम्मान का विशेष वातावरण देखने को मिला.

श्रीलंका के हवाई अड्डे पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री डॉ. हिनिदुमा सुनील सेनेवी और लोक प्रशासन, प्रांतीय परिषदों एवं स्थानीय Government के मंत्री एएचएमएच अभयरत्ना ने कार्यवाहक उच्चायुक्त के साथ मिलकर देवनीमोरी अवशेषों का औपचारिक स्वागत किया. इस दौरान बौद्ध भिक्षुओं, अधिकारियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी गरिमामय बना दिया.

इन पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी 4 से 10 फरवरी तक श्रीलंका की राजधानी कोलंबो स्थित प्रसिद्ध गंगारामया मंदिर में आयोजित की जाएगी. आयोजकों के अनुसार, इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और आगंतुकों के मंदिर पहुंचने की उम्मीद है. गंगारामया मंदिर, जो श्रीलंका के प्रमुख बौद्ध स्थलों में से एक है, ने अवशेषों के सुरक्षित प्रदर्शन और सार्वजनिक दर्शन के लिए व्यापक और सुव्यवस्थित इंतजाम किए हैं.

श्रीलंका रवाना होने से पहले राजधानी स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में और उसके बाद हवाई अड्डे पर विशेष पवित्र मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया. इन समारोहों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने प्रार्थना कर अवशेषों के प्रति अपनी आस्था और सम्मान प्रकट किया. यह दृश्य बौद्ध धर्म की गहरी आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाने वाला रहा.

बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र माने जाने वाले देवनीमोरी अवशेष पहली बार अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए विदेश यात्रा पर गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस ऐतिहासिक आयोजन के जरिए न केवल श्रीलंका, बल्कि अन्य देशों से भी हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस प्रदर्शनी को देखने पहुंचेंगे, जिससे बौद्ध विरासत के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ेगी.

अधिकारियों ने बताया कि यह प्रदर्शनी India और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों का प्रतीक है. इसे India की सांस्कृतिक कूटनीति को सशक्त करने और पूरे क्षेत्र में बौद्ध विरासत को बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों के रूप में भी देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि इस पहल से दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और संपर्क और अधिक प्रगाढ़ होंगे.

बता दें कि इस प्रदर्शनी की घोषणा Prime Minister Narendra Modi ने अप्रैल 2025 में श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान की थी. यह कदम India की अपनी समृद्ध बौद्ध विरासत को दुनिया के साथ साझा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वैश्विक बौद्ध विरासत के एक जिम्मेदार संरक्षक के रूप में India की भूमिका को रेखांकित करता है.

श्रीलंका के President अनुरा कुमारा दिसानायके और Prime Minister डॉ. हरिणी अमरसूर्या ने कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस पवित्र आयोजन को संभव बनाने के लिए Prime Minister Narendra Modi के प्रति आभार व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि यह पहल दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक साबित होगी.

एएसएच/डीकेपी

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.