इस बार बजट 2026 में सरकार ने शेयर बाजार में सट्टा खेलने वाले निवेशकों को तगड़ा झटका दिया. सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स में 150 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी. इसके बाद यह अटकलें लगाई जा रहीं थीं कि सेबी अब फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर और सख्ती करने वाली है. लेकिन अब सेबी की ओर से ऐसा बयान आया है, जिससे F&O ट्रेडर्स को बड़ी राहत मिली है.
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने साफ कर दिया है कि फिलहाल डेरिवेटिव मार्केट में किसी भी तरह के नए नियम या रोक लगाने की तैयारी नहीं है. उन्होंने कहा कि जो रेगुलेटरी सिस्टम अभी लागू है, वही आगे भी जारी रहेगा. इसका मतलब साफ है कि न तो ट्रेडिंग पर कोई नया कर्ब लगेगा और न ही मौजूदा नियमों में कोई बदलाव किया जाएगा.
वीकली एक्सपायरी को लेकर भी क्लियर स्टैंडहाल के दिनों में यह अटकलें भी थीं कि सेबी वीकली एक्सपायरी सिस्टम को खत्म कर सकता है या उसमें बड़ा बदलाव कर सकता है. इस पर भी सेबी चेयरमैन ने पूरी तरह स्थिति साफ कर दी. उन्होंने कहा कि वीकली एक्सपायरी को बंद करने या बदलने का कोई प्रस्ताव सेबी के सामने नहीं है. यानी ऑप्शन ट्रेडर्स जिस सिस्टम में अभी काम कर रहे हैं, वही सिस्टम आगे भी चलता रहेगा.
STT बढ़ने के पीछे सरकार की सोचबजट 2026-27 में सरकार ने डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर STT बढ़ाने का फैसला लिया है. इक्विटी फ्यूचर्स पर STT को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया है. इसके अलावा ऑप्शंस प्रीमियम और ऑप्शन एक्सरसाइज पर भी टैक्स बढ़ाया गया है. सरकार का मानना है कि भारत में F&O ट्रेडिंग का कुल वॉल्यूम देश की GDP से कई गुना ज्यादा हो गया है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान छोटे यानी रिटेल निवेशकों को हो रहा है. हालांकि, सेबी चेयरमैन ने STT बढ़ाने के फैसले पर सीधे कोई टिप्पणी नहीं की. उन्होंने यह जरूर कहा कि सेबी, सरकार द्वारा बजट में घोषित प्रस्तावों को लागू करने को लेकर बाजार से जुड़े सभी पक्षों से बातचीत करेगा, ताकि किसी भी फैसले से बाजार की स्थिरता प्रभावित न हो.
ऑप्टिमम रेगुलेशन पर सेबी का फोकसतुहिन कांत पांडेय ने दोहराया कि सेबी का मकसद जरूरत से ज्यादा सख्ती नहीं, बल्कि ऑप्टिमम रेगुलेशन रखना है. इसका मतलब है कि नियम इतने हों कि बाजार सुरक्षित रहे, लेकिन इतने भी कठोर न हों कि ट्रेडिंग और निवेश पर असर पड़े. खासकर कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को मजबूत करने पर सेबी का खास ध्यान रहेगा.
ट्रेडर्स के लिए क्या मायने रखता है ये ऐलानइस पूरे घटनाक्रम का सीधा मतलब यह है कि STT बढ़ने के बावजूद F&O ट्रेडर्स को फिलहाल किसी अतिरिक्त डर की जरूरत नहीं है. न तो नए नियम आएंगे, न वीकली एक्सपायरी बदलेगी और न ही ट्रेडिंग स्ट्रक्चर में कोई बड़ा झटका लगेगा. सेबी का यह रुख बाजार में भरोसा बनाए रखने वाला माना जा रहा है.
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