इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 100 वर्षीय बुजुर्ग को हत्या के मामले में बरी किया
Gyanhigyan February 06, 2026 08:42 AM
इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

प्रयागराज समाचार: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक 100 वर्षीय व्यक्ति को हत्या के एक पुराने मामले में बरी कर दिया है। उन पर 1982 में एक भूमि विवाद के चलते हत्या में शामिल होने का आरोप था। इस मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अब, चार दशकों के बाद, अदालत ने उन्हें निर्दोष घोषित कर दिया।


हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस चंद्र धारी सिंह और जस्टिस संजीव कुमार शामिल थे, ने कहा कि आरोपी की अपील काफी समय से लंबित थी और उनकी उम्र को देखते हुए राहत प्रदान करना आवश्यक था।


मामले का संक्षिप्त विवरण:
यह मामला 1982 का है, जब एक भूमि विवाद के कारण एक व्यक्ति की हत्या हुई थी। इस मामले में तीन व्यक्तियों— माइकू, सत्ती दीन और धामी राम— को आरोपी बनाया गया था।
- माइकू घटना के बाद फरार हो गया था।
- 1984 में, हमीरपुर सेशंस कोर्ट ने सत्ती दीन और धामी राम को उम्रकैद की सजा सुनाई।
- धामी राम उसी वर्ष जमानत पर रिहा हो गए थे।
- सत्ती दीन की अपील के दौरान मृत्यु हो गई, जिससे धामी राम इस मामले में एकमात्र जीवित अपीलकर्ता रह गए।


अदालत का निर्णय:
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। सबूत इतने मजबूत नहीं थे कि दोष सिद्ध किया जा सके। कोर्ट ने यह भी माना कि:
- अपील में अत्यधिक देरी हुई।
- आरोपी ने कई वर्षों तक मानसिक तनाव और सामाजिक कलंक झेला।
- उनकी उम्र अब लगभग 100 वर्ष है।
इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।


जमानत बॉन्ड का निपटारा:
चूंकि धामी राम लंबे समय से जमानत पर थे, हाई कोर्ट ने उनके जमानत बॉंड को समाप्त करने का आदेश भी दिया।


© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.