सबको आशीर्वाद देने वाले अघोरी साधु ने जब खुद लिया नन्ही कन्या का आशीर्वाद, वीडियो वारयल
पल्लवी कुमारी February 06, 2026 02:42 PM

Viral Video: सोशल मीडिया पर रोजाना कई तरह के रील और वीडियो देखने को मिलते हैं, जिनमें कुछ वीडियो दिल को छू जाते हैं तो वहीं कुछ दृश्य भावुक भी कर देते हैं. हालांकि में एक ऐसा ही वीडियो सामने आया जिसमें "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥" श्लोक की झलक दिखाई दी.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि, एक अघोरी साधु बाबा बैठे हुए हैं और लोग कतार में आते हुए उनका आशीर्वाद ले रहे हैं. अघोरी भी सभी को आशीर्वाद देते हैं. लेकिन जैसे ही एक छोटी कन्या आती है वे अपना हाथ पहले तो उसके सिर पर रखकर आशीर्वाद देते हैं और फिर कन्या को अपने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देने के लिए कहते हैं. यह वीडियो केरल कुंभ मेले का बताया जा रहा है. लोगों द्वारा इस वीडियो को काफी पसंद किया जा रहा है. साथ ही लोग वीडियो में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं.

अनुज अग्निहोत्री श्रीवास्तव ने वीडियो को X पर पोस्ट करते हुए लिखा- केरल कुंभ मेले में एक अघोरी साधु बैठे हैं, जिनसे लोग आशीर्वाद लेने आ रहे हैं. आमतौर पर लोग साधु-संतों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं. यहां भी बड़े-बूढ़े और अन्य लोग साधु का आशीर्वाद ले रहे हैं, जब एक छोटी बच्ची साधु के पास आती है, तो साधु का व्यवहार बदल जाता है. वह स्वयं उस बच्ची के सामने हाथ जोड़ते हैं, उसे देवी के रूप में सम्मान देते हैं और उससे आशीर्वाद मांगते हैं.

यह दृश्य इस बात का प्रतीक है कि हिंदू धर्म में 'कन्या' (छोटी बच्ची) को साक्षात शक्ति या देवी का रूप माना जाता है. एक तपस्वी, जिसने सांसारिक मोह माया त्याग दी है, वह भी एक छोटी बच्ची के सामने नतमस्तक होकर समाज को नारी शक्ति के सम्मान का संदेश दे रहा है. यह वीडियो केवल धार्मिक भक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि यह बेटियों के प्रति आदर और उनके देवी तुल्य होने के भाव को दर्शाता है.

वीडियो पर यूजर्स की प्रतिक्रियाएं

एक यूजर ने लिखा- ‘यह दृश्य सनातन धर्म की आत्मा को दर्शाता है, जहां कन्या को देवी, शक्ति और सृष्टि का मूल माना गया है. एक अघोरी साधु का बच्ची के सामने नतमस्तक होना यह सिखाता है कि वास्तविक तप और धर्म वही है जहां नारी का सम्मान सर्वोपरि हो. सनातन केवल पूजा नहीं, बल्कि मूल्य, संस्कार और संतुलन का जीवन-दर्शन है. इसीलिए कहा गया है “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।” अर्थ: जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं. यही है सनातन की शक्ति, यही है उसका संदेश.

एक अन्य यूजर ने लिखा- एक सच्चा साधू. यह जहां जाते हैं समाज को सही दिशा देते हैं. बहुत सुंदर वीडियो.

एक और यूजर ने लिखा है- यही तो हमारे सनातन धर्म संस्कृति एवं परंपरा का सार है क्योंकि, हमारे यहां तो कहा ही जाता है कि नारी तू नारायणी.

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