शुगर या डायबिटीज के मरीज को जिंदगी भर दवा और खानपान में हद से ज्यादा रोकटोक के साथ लाइफ गुजारनी पड़ती है. शुगर लेवल अगर 200 एमजी/डीएल के पार रहे तो ये टेंशन की बात है. वैसे नॉर्मल शुगर लेवल 120 के अंदर होता है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक ज्यादातर लोगों को बहुत देर से पता चलता है कि उन्हें डायबिटीज की बीमारी हो गई है. डायबिटीज के मरीज की डाइट में ऐसी चीजों को खाने की सलाह दी जाती है जिनमें नेचुरल शुगर कम हो और इन्हें पचाना आसान हो. वैसे भारतीयों के खानपान की बात की जाए तो अधिकतर की थाली में गेहूं की रोटी जरूर शामिल होगी. लंच हो डिनर.. चावल और गेहूं की रोटी के बिना खानपान पूरा नहीं होता. वैसे मरीजों के लिए कहा जाता है कि गेहूं की शुगर के लेवल को बढ़ा सकती है.
अब ये मिथक है या सच इसका सच जानने के लिए टीवी9 ने सीनियर डाइटिशियन गीतिका चोपड़ा से खास बातचीत की. चलिए आपको बताते हैं कि रोजाना सिर्फ गेहूं की रोटी खाना कितना सही है या गलत? साथ ही आप किन चीजों का ख्याल रखकर शुगर लेवल को नॉर्मल या कंट्रोल में रख सकते हैं.
शुगर वालों को गेहूं की रोटी खानी चाहिए या नहीं?सीनियर डाइटिशियन गीतिका चोपड़ा कहती हैं कि ये बहुत लोगों में कॉमन कंफ्यूजन है कि गेहूं को खाने से शुगर बढ़ती है. एक्सपर्ट कहती हैं कि गेहूं अपने आप में बैड फूड नहीं है. लेकिन कौन सा गेहूं किस फॉर्म और कितनी मात्रा में खाया जा रहा है, यही तय करता है कि ब्लड शुगर स्पाइक होगा या नहीं. साइंस के हिसाब से गेहूं एक कार्बोहाइड्रेट सोर्स है और कार्ब्स में जाकर ग्लूकोज में कन्वर्ट होते हैं. अगर गेहूं रिफाइंड फॉर्म में खाया जाता है जैसे मैदा, ब्रेड, नान, बिस्कुट या पास्ता तो ये रैपिडिली डाइजेस्ट होता है और ब्लड शुगर को हाई पर ले जाता है.
इसलिए डायबिटीज मरीज के लिए रिफाइंड सीधे तौर पर नुकसानदायक है. लेकिन साबुत अनाज का आटा जिसमें फाइबर होता है जो डाइजेशन में हेल्प करता है और शुगर एब्जॉर्बशन नॉर्मल तरीके से हो पाता है. इस फॉर्म में गेहूं शुगर को उतना एग्रेसिवली स्पाइक नहीं करता जब तक मात्रा कंट्रोल में हो.
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इन अनाजों की रोटी खाएंएक्सपर्ट ने आगे कहा कि डायबिटीज के मरीजों के लिए प्रॉब्लम तक बढ़ती है जब रोज सिर्फ गेहूं की रोटी ही खाई जाए. रोजाना 3 से 4 रोटी बिना प्रोटीन और फाइबर के खाई जाए तो ये प्रॉब्लम और बढ़ सकती है. एक्सपर्ट कहती हैं कि डायबिटीज पेशेंट सिर्फ गेहूं पर डिपेंड न रहें. ऐसे लोग हफ्ते में 3 तीन दिन गेहूं की रोटी खा सकते हैं लेकिन दूसरे अनाजों के आटे से बदल-बदलकर. आप चाहे तो ज्वार, बाजरा, रागी और जौ को गेहूं के आटे में मिलाकर खा सकते हैं. आप सीधे भी इन अनाजों की रोटी को रोज बदल-बदलकर खा सकते हैं. ये अनाज लोग ग्लाइसेमिक होते हैं और इंसुलिन रिस्पॉन्स को बैटर रखते हैं.

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि हम गेहूं को पूरी तरह से मना नहीं करते हैं लेकिन रोज और ज्यादा मात्रा में खाना सही नहीं है. अगर खाना है तो साबुत अनाज और 1 से द रोटी, फाइबर वाली सब्जी और प्रोटीन का इंटेक भी है ऐसी थाली तैयार करें. शुगर कंट्रोल का असली सीक्रेट अनाजों को बदल-बदलकर खाना है. इसके अलावा टुकड़ों में खाएं और बैलेंस प्लेट पर फोकस करें. सिर्फ गेहूं को शुगर बढ़ाने के लिए दोष देना सॉल्यूशन नहीं है.
शुगर लेवल को ऐसे करें कंट्रोल । Sugar Level Control Tips-अगर किसी को डायबिटीज की बीमारी हो गई है तो इसे कंट्रोल में रखने के लिए फाइबर का इंटेक जरूर करें.
-दिनभर में सिर्फ पानी के भरोसे बॉडी को हाइड्रेट रखने की कोशिश न करें. खीरा, टमाटर या दूसरी फाइबर वाली चीजों को सलाद में जरूर खाएं. खाने से पहले सही मात्रा में सलाद खाएं.
-रोटी से पेट भरने के बजाय सब्जियों का सेवन ज्यादा करें. जड़ वाली सब्जियों को खाने से परहेज करें. वहीं फ्रूट खाने हैं तो पपीता, केला (1 या 2), सेब, नाशपाती, अंगूर, संतरा को खा सकते हैं. ध्यान रहे कि ऐसे लोगों फल काटकर खाने चाहिए. जूस बनाकर पीने से इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बढ़ जाता है, जो शरीर को काफी नुकसान भी पहुंचाता है.
-ध्यान रहे कि ऐसे लोगों को पूर दिन में थोड़ी देर सैर जरूर करनी है.