Madhubala Dilip Kumar Love Story: वैलेंटाइन वीक की शुरुआत ‘रोज डे’ के साथ हो चुकी है। प्यार के इजहार के लिए गुलाब को सबसे खूबसूरत प्रतीक माना जाता है। फिल्मी दुनिया में भी गुलाब और मोहब्बत के कई यादगार किस्से मिलते हैं, लेकिन हिंदी सिनेमा की सबसे मशहूर प्रेम कहानियों में से एक है मधुबाला और दिलीप कुमार की मोहब्बत, जिसकी शुरुआत भी एक गुलाब से हुई थी।
कहा जाता है कि मधुबाला दिलीप कुमार की जबरदस्त फैन थीं। जब उन्होंने पहली बार दिलीप साहब को देखा, तो मानो उन्हें अपना पूरा संसार नजर आ गया। दिलीप कुमार उस समय अविवाहित थे, लेकिन उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि मधुबाला उन्हें मन ही मन चाहने लगी हैं। एक दिन दिलीप कुमार के पास मधुबाला की ओर से एक पत्र और एक पैकेट पहुंचा। पत्र में लिखा था कि आपको एक गुलाब का फूल भेज रही हूं। प्यार कबूल हो तो गुलाब अपने पास रखिए, वरना इन्हीं हाथों वापस भेज दीजिए।
फिल्मों से बढ़ा रिश्तादिलीप कुमार ने वह गुलाब अपने पास रख लिया। इसी एक फैसले ने बॉलीवुड की सबसे चर्चित प्रेम कहानी की नींव रख दी। मधुबाला और दिलीप कुमार की पहली मुलाकात 1951 की फिल्म ‘तराना’ के दौरान हुई थी। इसके बाद दोनों ने साथ में कई फिल्में कीं और करीब नौ साल तक उनका रिश्ता चला। इंडस्ट्री में इनके प्यार के चर्चे आम थे और फैंस इन्हें रियल लाइफ कपल के तौर पर देखने लगे थे।
कोर्ट केस बना दीवारहालांकि, यह मोहब्बत मंज़िल तक नहीं पहुंच सकी। कहा जाता है कि मधुबाला के पिता अताउल्ला खान को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। वे मधुबाला को आउटडोर शूटिंग की इजाजत भी नहीं देते थे। मधुबाला की बहन मधुर बृजभूषण के मुताबिक, असली वजह फिल्म ‘नया दौर’ से जुड़ा कोर्ट केस था। मधुबाला के पिता और निर्माता के बीच विवाद हुआ, जिसमें दिलीप कुमार ने चोपड़ा का पक्ष लिया। इससे मधुबाला का दिल टूट गया और दोनों के बीच दूरियां आ गईं।
मुगल-ए-आजम में दिखा अधूरा इश्कफिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ की शूटिंग के दौरान कहा जाता है कि दोनों सेट पर एक-दूसरे से बात तक नहीं करते थे, लेकिन पर्दे पर दिखा उनका इश्क सिर्फ अभिनय नहीं था वो उनकी अधूरी मोहब्बत थी। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। ने मधुबाला के लिए कहा था कि मैं उनसे हमेशा प्यार करूंगा। 23 फरवरी 1969 को महज 36 साल की उम्र में मधुबाला का निधन हो गया, जबकि 2021 में दिलीप कुमार भी दुनिया को अलविदा कह गए। गुलाब से शुरू हुई यह मोहब्बत भले ही अधूरी रह गई, लेकिन आज भी इसकी खुशबू ज़िंदा है।