राजस्थान में एक तरफ सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। फंड की कमी के चलते कई स्कूलों की मरम्मत नहीं हो पा रही है और बच्चों को असुरक्षित और अधूरी संरचनाओं में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
वहीं दूसरी तरफ, राज्य सरकार ने अपने मंत्रियों के लिए करीब 55 लाख रुपए कीमत वाली नई फॉर्च्यूनर गाड़ियां खरीदने का फैसला किया है। इस कदम पर कांग्रेस ने तीखा सवाल उठाया है और पूछा कि क्या बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की अनदेखी करके सरकारी पैसा ऐसे खर्च करना उचित है।
सरकार ने अपनी दलील में कहा कि मंत्रियों के लिए वाहन खरीदना कार्यात्मक जरूरत के तहत किया जा रहा है और इसे प्रशासनिक सुविधाओं में शामिल किया गया है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि जनधन का उचित इस्तेमाल पहले प्राथमिकताओं के हिसाब से होना चाहिए, जिसमें शिक्षा और सुरक्षा की स्थिति सुधारना प्रमुख होना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पब्लिक फंड और प्रशासनिक खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। जनता और विपक्ष के बीच यह मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।