जगदीप धनखड़ ने क्यों छोड़ा उपराष्ट्रपति का पद? हामिद अंसारी ने खोला अब तक का सबसे बड़ा राज!
UPUKLive Hindi February 07, 2026 04:42 PM

नई दिल्ली: देश की राजनीति में पिछले कुछ समय से उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ का इस्तीफा चर्चा का विषय बना हुआ है। अब इस पूरे मामले पर पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और कई ऐसी बातें कही हैं जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को मीडिया से बात करते हुए अंसारी ने साफ कहा कि धनखड़ के इस्तीफे की असली वजह आज भी एक रहस्य बनी हुई है।

उपराष्ट्रपति का पद छोड़ना सामान्य बात नहीं: हामिद अंसारी

हामिद अंसारी ने उपराष्ट्रपति पद की गरिमा और इसके संवैधानिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत के इतिहास में इस पद से इस्तीफा देना कोई छोटी घटना नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि आमतौर पर उपराष्ट्रपति तभी अपना पद छोड़ता है जब उसे राष्ट्रपति के रूप में चुना जाता है। इसके अलावा, बिना किसी बड़े कारण के इस तरह पद का त्याग करना हैरान करने वाला फैसला है। अंसारी ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि धनखड़ पर किसी तरह का कोई बाहरी दबाव था या नहीं। उन्होंने बस इतना कहा कि धनखड़ ने खुद इस्तीफा दिया, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी अब तक सामने नहीं आई है।

देश में कमजोर होता भाईचारा और बढ़ती असहिष्णुता

राजनीतिक चर्चा के अलावा, हामिद अंसारी ने देश के मौजूदा सामाजिक हालातों पर भी अपनी चिंता जाहिर की। उत्तराखंड के कोटद्वार में एक कपड़ों की दुकान पर हुए हमले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाज में असहिष्णुता (intolerance) तेजी से बढ़ रही है। अंसारी के मुताबिक, चाहे विवाद जाति का हो, भाषा का हो या क्षेत्र का—ये सभी इस बात के संकेत हैं कि हमारे बीच की आपसी एकता और भाईचारे की दीवारें कमजोर पड़ रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि लद्दाख से कन्याकुमारी तक हम भले ही अलग दिखते हों, लेकिन हमारी असली पहचान सिर्फ भारतीय नागरिक होना है।

नफरत और भेदभाव के लिए कौन है जिम्मेदार?

अंसारी ने आज के माहौल पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि अखबारों में आए दिन भाषा और धर्म के नाम पर होने वाले झगड़े दुखद हैं। उन्होंने इसके लिए किसी एक व्यक्ति को दोषी मानने से इनकार कर दिया। अंसारी के अनुसार, समाज में जो भी कड़वाहट घुल रही है, उसके लिए हर व्यक्ति कहीं न कहीं जिम्मेदार है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि बड़े नेताओं की जिम्मेदारी समाज को दिशा देने में सबसे ज्यादा होती है, लेकिन आम जनता भी अपनी भूमिका से बच नहीं सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हमने भाईचारे को नहीं बचाया, तो सामाजिक ढांचा बिखर सकता है।

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