प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में बीजेपी के नामांकित सांसद सी. सदानंदन मास्टर के पहले भाषण की तारीफ करते हुए कहा कि यह उनकी 'नैतिक ताकत और दृढ़ विश्वास' को दिखाता है. सांसद को लिखे एक पत्र में मोदी ने सदानंदन के हाल में दिए भाषण के दौरान अपनी बातों को 'शांत और आत्मविश्वासी तरीके' से प्रस्तुत करने की भी तारीफ की.
पीएम ने कहा कि सदानंदन भले ही संसद में नए हों, लेकिन आप अपने साथ देश प्रथम की विचारधारा के प्रति जीवन भर की सेवा और प्रतिबद्धता लेकर आए हैं. जब मैंने आपको बोलते हुए सुना तो मुझे आपके शब्दों में नैतिक शक्ति और दृढ़ विश्वास दिखाई दिया.
सदानंदन मास्टर ने X पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री की तारीफ के लिए आभार जताया. उन्होंने पत्र की फोटो शेयर कर कहा, 'सच में बहुत खुशकिस्मत हूं. राज्यसभा में मेरे पहले भाषण के लिए विश्व विख्यात श्री नरेंद्र मोदी जी की तरफ से प्रशंसा पत्र मिला. देश और उसके नेता से मिली यह अनमोल हौसलाअफजाई मेरे मकसद और सेवा की भावना को बहुत ताकत देगी.'
पीएम मोदी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि सदानंदन की हिम्मत के बारे में केरल में सब जानते थे, लेकिन जब उन्होंने ऊपरी सदन में अपने कृत्रिम अंग दिखाए, तो इससे संसद में और पूरे भारत में लोग हैरान रह गए. सदानंदन ने सोमवार को राज्यसभा में अपने पहले भाषण के दौरान अपने कृत्रिम पैर निकालकर दिखाए थे, जिस पर काफी हंगामा हुआ और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इसकी कड़ी आलोचना की तथा इसे नाटक बताया.
उन्होंने आरोप लगाया था कि तीन दशक पहले माकपा कार्यकर्ताओं के हमले में उन्हें अपने दोनों पैर गंवाने पड़े थे. अपने पत्र में इसी बात का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, 'लोग यह पचा नहीं पा रहे थे कि हमारे जैसे जीवंत लोकतंत्र में एक मेहनती शिक्षक पर एक पिछड़ी सोच वाली विचारधारा के समर्थक इस तरह हमला कैसे कर सकते हैं. आज, यह ध्यान देने वाली बात है कि वह पिछड़ी सोच वाली विचारधारा बहुत सिकुड़ गई है, जबकि आप गर्व से संसद में बैठे हैं.
कौन हैं सदानंदन मास्टर?
केरल के त्रिशुर में रहने वाले हाई स्कूल शिक्षक सी सदानंदन मास्टर 1999 से पेरामंगलम में श्री दुर्गा विलासम हायर सेकेंडरी स्कूल में सामाजिक विज्ञान पढ़ाते थे. उन्होंने असम के गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से बीकॉम और केरल के कालीकट यूनिवर्सिटी से बीएड की डिग्री हासिल की है. वे केरल में नेशनल टीचर्स यूनियन के उपाध्यक्ष हैं.
राजनीतिक हिंसा में गंवाए थे अपने दोनों पैर
जिस घटना का जिक्र उन्होंने किया, वो 25 जनवरी 1994 की है. जब कन्नूर जिले में उनके घर पर कुछ अपराधिक तत्वों ने हमला कर दिया था. कन्नूर का यह इलाका राजनीतिक हिंसा के लिए मशहूर रहा है. इस हमले के बाद उनके पैर काटने पड़े थे. कहा जाता है कि यह हमला माकपा समर्थकों ने किया था.
घटना की शुरुआत उस समय हुई, जब माकपा के एक कार्यकर्ता के बेटा-बेटी को बिना पूछे मंदिर ले जाकर जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण बनाने पर हुई थी. इसमें सी सदानंदन का नाम आया था. इस विवाद ने बाद में हिंसक रूप ले लिया था.
SFI छोड़कर RSS में हुए थे शामिल
सदानंदन कॉलेज के समय माकपा के स्टूडेंट विंग स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े थे. 1984 में SFI छोड़कर आरएसएस में शामिल हुए थे. इसके बाद उन्हें कुन्नुर जिले के सरकार्यवाह बनाया गया था. वो आरएसएस से बीजेपी में आए. 2016 और 2021 में कुन्नूर जिले के कूत्तुपरम्बा विधानसभा से टिकट दिया था. साल 2016 में उन्हें 20 हजार से ज्यादा वोट मिले थे, इस चुनाव में उन्हें माकपा उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा था. वह तीसरे नंबर पर रहे थे. वहीं, 2021 में 21 हजार से ज्यादा वोट मिले, लेकिन तब भी तीसरे नंबर पर आए. इसके बाद 2025 में सी सदानंदन मास्टर को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया. हालांकि, अभी तक राज्यसभा में उन्होंने सरकार से किसी तरह का सवाल नहीं पूछा है. वह शिक्षा, महिलाओं, बच्चों, युवाओं और खेल मामलों में समिति के सदस्य हैं. वह सोमवार में पहली बार किसी चर्चा में हिस्सा ले रहे थे.