लखनऊ। शेयर मार्केट में निवेश कर मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना साइबर क्राइम एवं साइबर सेल अलीगढ़ की संयुक्त टीमों ने कार्रवाई करते हुए 12 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान पीड़ित के खाते में 5 लाख 64 हजार रुपये की रकम वापस कराई गई है, जबकि तकनीकी विवेचना के आधार पर करीब 500 करोड़ रुपये की संभावित साइबर ठगी को समय रहते रोक लिया गया।
पुलिस के अनुसार गिरोह व्हाट्सएप के माध्यम से फर्जी इन्वेस्टमेंट ग्रुप बनाकर लोगों को जोड़ता था और शेयर मार्केट में 200 प्रतिशत तक मुनाफे का लालच देकर निवेश कराता था। जांच में सामने आया कि गिरोह के तार हांगकांग स्थित मास्टरमाइंड से जुड़े हुए हैं, जो भारतीय खाताधारकों को साइबर स्लेवरी में फंसाकर उनके खातों के जरिए विदेशों में धन ट्रांसफर कराते थे।
दिनांक 31 जनवरी 2026 को अलीगढ़ निवासी दिनेश कुमार शर्मा की शिकायत पर थाना साइबर क्राइम अलीगढ़ में मुकदमा दर्ज किया गया था। वादी को व्हाट्सएप लिंक के जरिए अपने पदचिह्न छोड़ते हुए अपना खुद का रास्ता बनाना”और वीआईपी 5 टारगेट प्रॉफिट क्रू क्लब” नामक ग्रुप में जोड़कर 18 दिसंबर 2025 से 28 जनवरी 2026 के बीच कुल 1 करोड़ 10 लाख 70 हजार रुपये की ठगी की गई थी।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कराया और एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से विभिन्न राज्यों में दर्ज 13 शिकायतों को आपस में लिंक किया। विवेचना के दौरान 600 से अधिक फर्जी व्हाट्सएप इन्वेस्टमेंट ग्रुप को I4सी और दूरसंचार विभाग के सहयोग से बंद कराया गया। इसके साथ ही इन ग्रुप्स से जुड़े करीब 500 लोगों को व्यक्तिगत रूप से फोन कर निवेश न करने की चेतावनी दी गई, जिससे लगभग 500 करोड़ रुपये की ठगी होने से बच गई।
गिरफ्तार अभियुक्तों के कब्जे से 30 पासबुक व चेकबुक, 28 डेबिट कार्ड, 23 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, 1 लैपटॉप, 2 जियो राउटर, फर्जी फर्मों की मुहरें और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। अभियुक्तों के खिलाफ महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और केरल में साइबर ठगी से संबंधित शिकायतें दर्ज हैं।
पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश श्री राजीव कृष्ण के निर्देशन में साइबर अपराध के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा साइबर अपराध को राज्य की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानते हुए सख्त निर्देश दिए गए हैं। मामले में विदेश में बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए सीबीआई और इंटरपोल से समन्वय किया जा रहा है।