ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने देश की जनसंख्या को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने साफ शब्दों में कहा कि भारत में मुस्लिम आबादी कभी भी हिंदू आबादी से ज्यादा नहीं हो सकती। तेलंगाना में होने वाले नगर निगम चुनाव के मद्देनजर निजामाबाद में आयोजित एक रैली के दौरान ओवैसी ने ये बातें कहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के हालिया बयानों का जिक्र करते हुए देश के भविष्य और बढ़ती उम्र की चुनौतियों पर सरकार को घेरा।
युवा भारत और रोजगार की चुनौतीओवैसी ने अपनी रैली में प्रधानमंत्री मोदी के राज्यसभा में दिए गए भाषण का हवाला दिया, जिसमें पीएम ने कहा था कि दुनिया बूढ़ी हो रही है लेकिन भारत एक युवा देश है। इस पर सवाल उठाते हुए ओवैसी ने पूछा कि अगर देश की 60 प्रतिशत आबादी 40 साल से कम उम्र की है, तो सरकार ने उनके भविष्य के लिए क्या रोडमैप तैयार किया है? उन्होंने सीधा सवाल किया कि इन युवाओं को रोजगार देने और उन्हें हुनरमंद बनाने के लिए मोदी सरकार ने अब तक कौन से ठोस कदम उठाए हैं?
मुस्लिम आबादी पर ओवैसी का बड़ा दावाजनसंख्या वृद्धि के आरोपों पर पलटवार करते हुए ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम आबादी अब स्थिर होने की दिशा में है। उन्होंने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जाता है कि मुसलमान हिंदुओं से आगे निकल जाएंगे। ओवैसी के मुताबिक, 20 साल बाद आज की युवा आबादी बूढ़ी हो जाएगी, लेकिन सरकार इस पर ध्यान देने के बजाय केवल आबादी बढ़ने का डर दिखाती रहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में महंगाई और बुजुर्गों के खर्चों का बोझ बढ़ेगा, जिसके बारे में अभी कोई योजना नहीं बनाई जा रही है।
ओवैसी ने इस दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा कि एक तरफ आरएसएस प्रमुख तीन बच्चे पैदा करने की सलाह देते हैं, जबकि दूसरी तरफ जनसंख्या नियंत्रण कानून की बातें की जाती थीं। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि भागवत खुद अपनी सलाह पर अमल नहीं करते। उन्होंने कहा कि अब सत्ता पक्ष को यह समझ आने लगा है कि आने वाले 25-30 सालों में देश की आबादी बुजुर्ग हो जाएगी, इसलिए अब जनसंख्या नियंत्रण बिल की चर्चा ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है और मुसलमानों की आलोचना कम हो रही है।