देश में नए श्रम कानून के आने के बाद से कई संगठनों के द्वारा इसे चुनौती दी गयी. इसके साथ ही विपक्ष ने इसपर वाल उठाए. इन सबके बीच सरकार की ओर से इस बात का दावा किया गया है कि 2 महीने लेबर लॉ को हो चुके हैं. इस बीच 66 फ़ीसदी वर्कर्स का कहना है नए रूल्स से क्लेरिटी आई है. साथ ही 60 फ़ीसदी वर्कर्स का यह कहना है, इसमें जॉब सिक्योरिटी को बढ़ाने के उपाय हैं. एम्प्लॉयर्स का यह कहना है कि 76 फ़ीसदी वर्क फोर्स में सस्टनेबिलिटी आएगी. यह अध्ययन वी.वी. गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान (वीवीजीएनएलआई), नोएडा द्वारा किया गया है.
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि ये निष्कर्ष देश के विविध श्रम बाजार में सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा, सम्मानजनक काम, औपचारिकीकरण और समावेशी एवं टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के श्रम संहिता के उद्देश्य को रेखांकित करते हैं.
कम्प्लाइंस में क्लेरिटी आएगीलगभग 60 प्रतिशत श्रमिकों का मानना है कि समग्र कार्य परिस्थितियों में सुधार होगा, 63 प्रतिशत को कार्य घंटों के बेहतर नियमन की उम्मीद है और 60 प्रतिशत को बेहतर विश्राम अवधि और अवकाश प्रथाओं की उम्मीद है. इसके साथ ही लगभग 66 प्रतिशत श्रमिकों का मानना है कि सुरक्षा, परिवहन और निगरानी संबंधी आवश्यकताओं से महिला श्रमिकों की सुरक्षा में सुधार होगा, जबकि 63 प्रतिशत का मानना है कि अनिवार्य सुरक्षा उपकरण और सुरक्षात्मक उपाय कार्यस्थल की स्थितियों को मजबूत करेंगे.
वेतन पर भी पड़ेगा असरइस रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि लगभग 64 प्रतिशत श्रमिक वेतन पारदर्शिता और समय पर भुगतान के माध्यम से बेहतर आय सुरक्षा की उम्मीद करते हैं, जबकि 54 प्रतिशत बेहतर वेतन भुगतान की समयबद्धता की अपेक्षा करते हैं. साथ ही बात यदि सामाजिक सुरक्षा की करें तो इस मुद्दे पर 68 प्रतिशत श्रमिक आसान पहुंच के लिए ई-श्रम और कल्याण बोर्डों का स्वागत करते हैं, और 63 प्रतिशत संविदा, प्रवासी और गिग श्रमिकों के लिए अधिक सुवाह्यता देखते हैं.
नियामक सरलीकरण और दक्षता