कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में पंकी स्थित एचडीएफसी बैंक की एक शाखा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों के बीच बहस को जन्म दिया है। इस वीडियो में एक महिला कर्मचारी गुस्से में किसी व्यक्ति के साथ तीखी बहस करती नजर आ रही हैं। यह मामला तब और बढ़ गया जब उन्होंने बातचीत के दौरान अपनी जाति का उल्लेख किया। इस वीडियो को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब संबंधित कर्मचारी ने खुद आकर पूरे घटनाक्रम पर अपनी सफाई दी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हुए इस वीडियो में आस्था सिंह नाम की कर्मचारी एक व्यक्ति के साथ बहस करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह गुस्से में उंगली उठाते हुए बात कर रही हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “मैं ठाकुर हूं,” और सामने वाले व्यक्ति को चेतावनी दी कि उनसे पंगा न लिया जाए। इस बयान को लेकर कई लोगों ने आपत्ति जताई और इसे जातिगत पहचान का इस्तेमाल कर दबाव बनाने की कोशिश बताया।
कर्मचारी का स्पष्टीकरण
वीडियो वायरल होने के बाद आस्था सिंह ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह घटना हाल की नहीं, बल्कि 6 जनवरी की है। उन्होंने कहा कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह बहस किसी ग्राहक के साथ नहीं, बल्कि उनकी सहकर्मी के पति के साथ हुई थी।
सिंह ने बताया कि उनकी सहकर्मी ने उसी दिन इस्तीफा दिया था और वह तुरंत कार्यमुक्त होना चाहती थीं। उस दिन उनकी सहकर्मी की भाभी सुबह से शाखा में मौजूद थीं, जिनसे उनकी हल्की बहस हो गई थी। बाद में इस बात की जानकारी सहकर्मी के पति को दी गई।
कैसे बढ़ा विवाद?
आस्था सिंह का कहना है कि सहकर्मी का पति शाम करीब 4:30 बजे बैंक में आया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। उनके मुताबिक, उसने उनसे उनकी जाति पूछी और उन पर घमंड का आरोप लगाया। सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि उस व्यक्ति ने उन्हें ‘सबक सिखाने’ की धमकी दी और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया।
सिंह के अनुसार, धमकी मिलने के बाद उन्होंने गुस्से में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने माना कि उनके शब्द ठीक नहीं थे और एक बैंक कर्मचारी होने के नाते उन्हें संयम रखना चाहिए था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी की धमकी को चुपचाप सहना संभव नहीं था।
जाति वाले बयान पर क्या कहा?
अपने स्पष्टीकरण वीडियो में आस्था सिंह ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने दोहराया कि उन्हें अपनी जाति पर गर्व है और इस बात को कहने में उन्हें कोई झिझक नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कार्यस्थल पर भाषा और व्यवहार को लेकर सावधानी जरूरी है।