मतदान से 24 घंटे पहले हिंदुओं को खुश करने की कोशिश, बांग्लादेश सरकार ने दीपू दास के परिवार को दी 50 लाख की मदद
TV9 Bharatvarsh February 11, 2026 04:43 PM

अब से ठीक 24 घंटे बाद यानी 12 फरवरी को बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे. चुनावी माहौल अपने चरम पर है और ऐसे में मतदान से ठीक एक दिन पहले सरकार ने एक अहम घोषणा कर दी है. मॉब लिंचिंग के शिकार हुए हिंदू युवक दीपू चंद्र दास के परिवार को 50 लाख टका की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया है. पिछले साल दिसंबर में दीपू की सरेआम हत्या कर दी गई थी.

सरकार के इस फैसले को जहां एक ओर मानवीय संवेदना से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे चुनाव से पहले हिंदू समुदाय को साधने की कोशिश के तौर पर भी चर्चा मिल रही है. मुख्य सलाहकार कार्यालय (CAO) का कहना है कि यह मदद सरकारी सहायता कार्यक्रम के तहत दी जा रही है और इसका उद्देश्य पीड़ित परिवार को आर्थिक स्थिरता और सुरक्षा देना है.

दीपू दास के परिवार को क्या मदद मिलेगी?

सरकार की योजना के तहत दीपू दास के परिवार के लिए 25 लाख टका की लागत से एक नया घर बनाया जाएगा. इस परियोजना को नेशनल हाउसिंग अथॉरिटी लागू करेगी. इसके अलावा 10-10 लाख टका दीपू के पिता और पत्नी को सीधे नकद सहायता के रूप में दिए जाएंगे. सबसे अहम पहलू ये है कि उनके बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 5 लाख टका का फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR) कराया जाएगा. सरकार का कहना है कि दीपू अपने परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे, इसलिए यह कदम उनकी अनुपस्थिति में परिवार को संभालने के लिए जरूरी था.

दिसंबर में हुई थी निर्मम हत्या

18 दिसंबर को मायमेनसिंह के भालुका उपजिला के स्क्वायर मास्टरबाड़ी इलाके में दीपू चंद्र दास की भीड़ ने बेरहमी से हत्या कर दी थ. उन पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया गया था. भीड़ ने पहले उनकी पिटाई की, फिर उन्हें पेड़ से लटकाकर आग लगा दी. यह घटना पूरे देश में चर्चा और शर्म का कारण बनी. इस मामले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच जारी है.

मानवीय कदम या चुनावी रणनीति?

मतदान से ठीक पहले इस तरह की घोषणा ने राजनीतिक चर्चा को भी हवा दे दी है. आलोचकों का कहना है कि सरकार चुनाव में ये संदेश देना चाहती है कि वह अल्पसंख्यकों के साथ खड़ी है. वहीं समर्थकों का तर्क है कि देर से ही सही, लेकिन पीड़ित परिवार को न्याय और सहारा मिल रहा है.

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