बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को कौन नहीं जानता. हंसाने-गुदगुदाने में माहिर ये एक्टर इन दिनों अपनी एक्टिंग नहीं, बल्कि जेल जाने की वजह से सुर्खियों में हैं. लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस मामले में वह तिहाड़ जेल में सजा काट रहे हैं. ये सजा अचानक नहीं हुई. मामला सालों पुराना है. फिल्म बनाने के लिए लिया गया करोड़ों का कर्ज समय पर नहीं लौटाया गया, जिसके बाद चेक बाउंस का केस कोर्ट तक पहुंचा.
कोर्ट ने कई बार भुगतान के मौके दिए, लेकिन तय समयसीमा बार-बार टूटती रही. आखिरकार कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सजा बरकरार रखी और सरेंडर का आदेश दे दिया. आइए जानते हैं पूरा मामला कैसे शुरू हुआ और क्यों जेल तक पहुंचा. और अब राजपाल यादव का आगे क्या होगा.
राजपाल यादव चेक बाउंस केस की पूरी टाइम लाइन
2010- फिल्म के लिए लोन लिया
पूरा मामला शुरु होता है साल 2010 में जब राजपाल यादव ने फिल्म बनाने के लिए कर्ज लिया. उन्होंने फिल्म 'अता पता लापता' के लिए दिल्ली की मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का लोन लिया. फिल्म 2012 में रिलीज हुई और फ्लॉप हो गई. ये फिल्म करीब 11 करोड़ में बनी और इसने बॉक्स ऑफिस पर महज 38 लाख रुपये की कमाई की. इसके बाद से लोन चुकाने की दिक्कत शुरु हई.
2018- चेक बाउंस केस
फिल्म फ्लॉप होने के बाद राजपाल यादव लोन चुका नहीं पाए. उन्होंने कर्ज चुकाने के लिए जो 7 चेक दिए गए थे वो सारे बाउंस हो गए. और इसके बाद कानूनी रुप से केस स्टार्ट हुआ.
2018- पति-पत्नी दोषी
साल 2018 के अप्रैल महीने में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने Negotiable Instruments Act (धारा 138) के तहत राजपाल यादव और उनकी पत्नी को दोषी ठहराया और 6 महीने की जेल की सजा सुनाई.
2019- सेशंस कोर्ट
राजपाल यादव ने साल 2019 में सेशंस कोर्ट ने अपील की लेकिन यहां भी कोर्ट ने उनकी सजा बरकरार रखी.
2024- दिल्ली हाईकोर्ट
जून 2024 में राजपाल यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से इस मामले में राहत मिली. हाईकोर्ट ने उनकी सजा अस्थायी रूप से रोक दी लेकिन अदालत ने कहा कि वो अपना प्रयास दिखाएं कि पैसे लौटाना चाहते हैं. कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावनाएं तलाशने की सलाह दी और केस को मेडिएशन सेंटर भेज दिया. इसके बाद राजपाल यादव ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे कंपनी को कुल 2.5 करोड़ रुपए का भुगतान करेंगे. इसमें 40 लाख रुपए की पहली किश्त और 2.10 करोड़ रुपए की दूसरी किश्त शामिल थी. लेकिन अदालत के अनुसार, तय समयसीमा बीत जाने के बावजूद एक भी किश्त जमा नहीं की गई. 2024 तक ये कर्ज बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये हो चुका था.
2025- बार-बार वादा, बार-बार देरी
राजपाल यादव ने अक्टूबर 2025 में 75 लाख जमा किए गए. इसके बाद दिसंबर 2025 में भी 40 लाख देने का वादा किया लेकिन नहीं दे पाए.
इसके बाद कोर्ट ने कहा कि गंभीरता नहीं दिख रही.
2026- आखिरी मौका भी गया
इस साल यानि 2026 फरवरी में कोर्ट ने इस मामले में एक हफ्ते की मोहलत मांगने वाली याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कई बार सेटलमेंट करने के लिए समय दिया लेकिन पेमेंट नहीं किया गया. जज ने कहा कि सेलिब्रिटी होने से अलग नियम नहीं बन सकते. इस पर सख्त रुख अपनाते हुए अब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में बार-बार किए गए वादों का उल्लंघन बेहद गंभीर है. कोर्ट ने कहा कि अभिनेता को कई अवसर दिए गए, लेकिन हर बार उन्होंने अदालत के भरोसे को तोड़ा है. कोर्ट ने राजपाल यादव को 4 फरवरी को दोपहर 4 बजे तक आत्मसमर्पण करने का समय दिया.
5 फरवरी 2026- तिहाड़ जेल
5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया. उन्हें कोर्ट ने 6 महीने जेल की सजा सुनाई थी.
सरेंडर के बाद कहा- पैसे नहीं हैं
सरेंडर करने के बाद राजपाल यादव ने कहा- 'सर क्या करुं, मेरे पास पैसे नहीं हैं, कोई दूसरा उपाय भी नहीं दिखता. यहां हम सब अकेले हैं. कोई भी दोस्त नहीं हैं. मुझे इस मुसीबत का सामना खुद ही करना पड़ेगा.'
इसके बाद सवाल लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं. क्या 6 महीने जेल की सजा काटने के बाद उन्हें 9 करोड़ नहीं चुकाने पड़ेंगे? अगर उसके बाद भी ये पैसे नहीं चुकाए तो क्या होगा?
सबसे पहले जानते हैं कि इस केस के बारे में राजपाल यादव का क्या कहना है.
लल्लनटॉप को दिए एक इंटरव्यू में भी राजपाल यादव ने इस केस पर बात की थी. राजपाल यादव ने इसमें साफ किया था कि ये दूसरी पार्टी की तरफ से की गई एक इन्वेस्टमेंट थी. उन्होनें कहा था, 'मैंने पैसे लिए नहीं थे बल्कि उन्होंने फाइनेंसर के तौर पर खुद इनवेस्ट किए थे. उन्हें अपने पोते को हीरो बनाना था.'

साथ ही राजपाल यादव ने ये भी कहा, 'मैंने अदालत में भी विनम्रता के साथ अपनी बात रखी थी. अगर यह माना भी जाए कि मैंने 5 करोड़ रुपये लिए, तो मैं एक सार्वजनिक व्यक्ति हूँ- जनता को सच्चाई बताना ज़रूरी है. यह रकम आखिर थी क्या- लोन, इन्वेस्टमेंट या कुछ और? 15 करोड़ जैसी रकम कहीं गायब नहीं हो सकती.
मैं पिछले 40 साल से दुनिया भर में काम कर रहा हूँ, जिनमें 30 साल विदेशों में गुजरे हैं, और आज तक किसी ने मुझ पर उंगली नहीं उठाई. शुरू से मैं यही कहता आया हूँ कि मामले की असल प्रकृति साफ-साफ लिखी जाए.' इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि अगर कोर्ट नहीं होता तो सामने वाले तो फांसी लगवा देते.

अब राजपाल यादव का क्या होगा?
क्या जेल की सजा काट लेने के बाद कर्ज नहीं चुकाना पड़ेगा? क्या ये केस खत्म हो जाएगा? ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब जानने जरुरी हैं.
कानूनी भाषा में समझें तो जेल की सजा काटने से 9 करोड़ रुपये की देनदारी खत्म नहीं होगी. राजपाल यादव को जेल की सजा काटने के बाद भी या तो 9 करोड़ चुकाना पड़ेगा या फिर समझौता करना पड़ेगा. आपको बताते हैं क्यों?
ये चेक बाउंस मामला (Negotiable Instruments Act, धारा 138) का है. इस धारा में कानून में सजा दो तरह की होती है-
क्रिमिनल सजा- जिसमें जेल की सजा सुनाई जाती है या फिर पेनल्टी लगती है.
सिविल देनदारी- मूलधन के साथ ब्याज और हर्जाना तीनों चुकाना होता है
इसका मतल है कि कर्ज देना ही पड़ेगा.
इस मामले पर वाराणसी के अधिवक्ता वरुण सिंह का कहना है, 'डिशऑनर का चेक मामले में निर्धारित धनराशि चुकाने के बाद मामला समाप्त होने का प्रावधान है. लेकिन इसी से संबंधित आपराधिक मामलों से जुड़े विषयों में जैसे- 420 , 421 में तय धनराशि देने के बाद भी कोर्ट में ट्रायल चलता है. प्रतिवादी द्वारा लिखित आधार पर ही यह मामला समाप्त होता है.'
वो आगे बताते हैं, 'राजपाल यादव लोन न चुकाने का मामला क्रिमिनल ऑफेंस के दायरे में है जिसमें उन्हें 6 महीने की जेल की सजा हुई है. इसलिए उनके द्वारा धनराशि चुकाने के बाद सजा में राहत कोर्ट ट्रायल के बाद मिलेगी.'
एडवोकेट रुपेश दत्ता का कहना है कि राजपाल यादव की सजा रद्द हो सकती है अगर वो बकाया रकम चुका दें. रुपेश दत्ता ने एबीपी न्यूज़ को बताया, 'आम तौर पर गैर-समझौता योग्य (non-compoundable) मामलों में ऐसा संभव नहीं होता, लेकिन राजपाल यादव का चेक बाउंस मामला समझौता योग्य (compoundable) श्रेणी में आता है. अगर वे किसी व्यवस्था के तहत बकाया रकम लौटाने पर सहमत हो जाते हैं, तो उनकी 6 महीने की सजा निलंबित की जा सकती है, भले ही वे फिलहाल जेल में हों.'
वो आगे कहते हैं, 'इस समय वे सिर्फ इसलिए जेल में हैं क्योंकि उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पहले दिए गए समय का पालन नहीं किया और अदालत के आदेशों का अनुपालन नहीं कर पाए.'