झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है. चाईबासा के कराईकेला थाना क्षेत्र में एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण एक पिता को अपने मृत नवजात बच्चे के शव को डब्बे में रखकर घर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा. यह मामला कराईकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव का है.
बंगरासाई गांव के रामकृष्ण हेंब्रम की पत्नी रीता तिरिया को प्रसव पीड़ा होने के बाद चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया था. शनिवार को अस्पताल में रीता तिरिया ने एक मृत नवजात शिशु को जन्म दिया. इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.
एंबुलेंस तक नहीं मिलीपरिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने नवजात के शव को घर तक ले जाने के लिए किसी भी प्रकार की सहायता उपलब्ध नहीं कराई. परिवार ने कहा कि अस्पताल की ओर से न तो एंबुलेंस दी गई और न ही कोई अन्य वाहन की व्यवस्था की गई. मजबूरी में पिता रामकृष्ण हेंब्रम को अपने मृत बच्चे के शव को एक कार्टन (डब्बे) में रखकर गोद में लेकर अपने गांव तक ले जाना पड़ा.
मानवता को झकझोर देने वाली इस घटना की जानकारी जैसे ही आसपास के लोगों को मिली, स्थानीय ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिली. ग्रामीणों का कहना है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है और इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है.
क्या बोला अस्पताल प्रबंधन?लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां थीं कि एक मृत नवजात के शव को घर ले जाने के लिए भी अस्पताल की ओर से एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई. वहीं अस्पताल प्रबंधन का इस मामले में अलग पक्ष सामने आया है. अस्पताल अधिकारियों का कहना है कि परिवार की ओर से एंबुलेंस की मांग नहीं की गई थी और न ही इस संबंध में कोई सूचना दी गई थी. हालांकि पूरे मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और कहा है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है जब एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण परिवार को इस तरह की पीड़ा झेलनी पड़ी हो. इससे पहले दिसंबर 2025 में भी नवामुंडी प्रखंड से ऐसी ही एक घटना सामने आई थी. उस समय बालजोड़ी गांव के रहने वाले डिंबा चितोंबा को अपने चार महीने के मृत बेटे के शव को थैली में डालकर घर ले जाना पड़ा था क्योंकि उन्हें भी एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकी थी.