मध्य-पूर्व में भड़के युद्ध और ईरान के इर्द-गिर्द गहराते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की नींव हिला दी है. कच्चे तेल के दाम रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को छू रहे हैं. जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम इस कदर बेकाबू होते हैं, तो पूरी दुनिया में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो जाता है. माल ढुलाई महंगी होने से दैनिक उपयोग की हर वस्तु के दाम बढ़ जाते हैं, जिसका अंतिम बोझ आम जनता की जेब पर ही गिरता है.
होरमुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंदहोरमुज स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) महज समुद्री पानी का एक संकरा रास्ता नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है. दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कुल तेल का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है. ईरान युद्ध के कारण उपजे ताजा हालात ने इस अहम जलमार्ग को लगभग बंद कर दिया है. संभावित हमलों के खौफ से बड़ी टैंकर कंपनियां और जहाज मालिक इस इलाके से अपने जहाज निकालने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. परिवहन रुकने का सीधा अर्थ है अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की भारी किल्लत. जब सप्लाई चेन इस तरह से बाधित होती है, तो उपलब्धता कम होने के कारण कीमतें अपने आप आसमान छूने लगती हैं.
1983 के बाद का सबसे बड़ा उछालबाजार के आंकड़े इस संकट की गंभीरता को साफ तौर पर बयां कर रहे हैं. अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमतों में 20 फीसदी का भारी उछाल आया है और यह 109 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है. वहीं, ब्रेंट क्रूड भी पीछे नहीं है; इसमें 18 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह भी लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले सप्ताह अमेरिकी कच्चे तेल में 35 फीसदी की तेजी देखी गई. वायदा बाजार के इतिहास में साल 1983 के बाद से यह एक हफ्ते में दर्ज की गई सबसे बड़ी बढ़त है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होरमुज मार्ग जल्द बहाल नहीं हुआ, तो यह संकट एक विकराल रूप ले सकता है.
उत्पादन में भारी कटौतीसंकट केवल परिवहन का नहीं है, बल्कि उत्पादन के स्तर पर भी हालात बदतर हो रहे हैं. खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने खतरे को भांपते हुए अपने कदम पीछे खींचने शुरू कर दिए हैं.
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