जब कोई प्रिय व्यक्ति हमें छोड़कर चला जाता है, तो यह एक गहरा दुख होता है। कुछ लोग इस दुख को समय के साथ भुला देते हैं, जबकि अन्य इसे अपने दिल में संजोए रखते हैं। ऐसे में, मृतक की आत्मा की शांति के लिए कुछ विशेष करना एक विकल्प हो सकता है।
मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में एक परिवार ने अपनी पत्नी के निधन के बाद एक अनोखा कदम उठाया। पति ने अपनी पत्नी की याद में एक मंदिर बनवाया है, जो अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। आमतौर पर लोग देवी-देवताओं या प्रसिद्ध हस्तियों के मंदिर बनाते हैं, लेकिन इस पति ने अपनी पत्नी का मंदिर बनवाकर उसकी तीन फीट की प्रतिमा भी स्थापित की।
यह मंदिर शाजापुर जिला मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर दूर सांपखेड़ा गांव में स्थित है। यहां बंजारा समाज की स्वर्गीय गीताबाई राठौड़ की प्रतिमा है। उनके पति नारायणसिंह राठौड़ और परिवार के सदस्य प्रतिदिन इस प्रतिमा की पूजा करते हैं। घर में कोई शुभ कार्य होने पर वे आशीर्वाद लेते हैं और भोजन बनाते समय पहले भगवान को और फिर गीताबाई की प्रतिमा को भोग अर्पित करते हैं।
गीताबाई का निधन 27 अप्रैल को कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हुआ था। परिवार ने उन्हें बचाने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। उनके बेटे ने मां को भगवान से भी ऊपर मानते हुए उनके जाने के बाद उदासी महसूस की। इस दुख को दूर करने के लिए उन्होंने मां की याद में मंदिर बनाने का विचार अपने पिता से साझा किया, जो इस नेक कार्य के लिए सहमत हो गए।
परिवार ने 29 अप्रैल को अलवर के कलाकारों से गीताबाई की प्रतिमा बनाने का आदेश दिया। लगभग डेढ़ महीने बाद मूर्ति तैयार हुई। बेटे लक्की का कहना है कि मां की प्रतिमा देखकर ऐसा लगता है जैसे वह हमारे साथ हैं। मूर्ति की स्थापना पूर्ण विधि-विधान से की गई।
बेटों का कहना है कि मां अब बोलती नहीं हैं, लेकिन हर पल उनके साथ रहती हैं। परिवार का हर सदस्य प्रतिदिन उनकी पूजा करता है।