Sheetla Ashtami 2026: शीतला अष्टमी आज, क्यों नहीं जलाया जाता चूल्हा? जानें इसके पीछे की परंपरा और मान्यता
TV9 Bharatvarsh March 11, 2026 10:43 AM

Sheetla Ashtami Puja Vidhi: हिंदू धर्म में कई ऐसे पर्व होते हैं जिनका संबंध सीधे तौर पर लोक परंपराओं और आस्था से जुड़ा होता है. ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पर्व है शीतला अष्टमी, जिसे कई जगहों पर बसोड़ा भी कहा जाता है. इस दिन माता शीतला की पूजा करके परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. वहीं इस दिन एक खास परंपरा का पालन भी किया जाता है कि इसे दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है. आइए इसकी खास वजह जानते हैं.

शीतला अष्टमी की तिथि

धार्मिक पंचांग के अनुसार शीतला अष्टमी की अष्टमी तिथि 11 मार्च को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट से शुरू हो चुकी है और इसका समापन 12 मार्च को सुबह 4 बजकर 19 मिनट पर होगा.

क्यों नहीं जलाया जाता चूल्हा?

शीतला अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाने की खास परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन माता शीतला को ठंडा भोजन (बासी खाना) अर्पित किया जाता है. इसलिए एक दिन पहले यानी सप्तमी के दिन ही भोजन बनाकर रख लिया जाता है. अगले दिन वही ठंडा भोजन माता को भोग लगाया जाता है और परिवार के लोग भी उसी भोजन को ग्रहण करते हैं. इसे कई जगहों पर बसोड़ा भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार माता शीतला का संबंध शीतलता, स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा से माना जाता है. इसलिए इस दिन आग नहीं जलाई जाती और ठंडे भोजन का सेवन किया जाता है.

कैसे की जाती है पूजा?

शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद माता शीतला की पूजा की जाती है. भक्त माता को ठंडा भोजन, दही, चावल, पूरी, गुड़ और हलवा आदि का भोग लगाते हैं. कई जगहों पर महिलाएं मंदिर जाकर शीतला माता की कथा सुनती हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करती हैं. इसके बाद प्रसाद के रूप में वही ठंडा भोजन ग्रहण किया जाता है.

क्या है इस परंपरा का संदेश?

शीतला अष्टमी केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्वास्थ्य से जुड़ा एक संदेश भी माना जाता है. मौसम बदलने के समय स्वच्छता, संतुलित भोजन और सावधानी रखने का संकेत इस पर्व के माध्यम से मिलता है. इस तरह शीतला अष्टमी का पर्व आस्था, परंपरा और स्वास्थ्य तीनों का अनोखा संगम माना जाता है.

शीतला माता की पूजा का महत्व

शीतला अष्टमी का पर्व विशेष रूप से माता शीतला को समर्पित होता है. मान्यता है कि जो भक्त इस दिन श्रद्धा से पूजा करते हैं, उनके घर से रोग, संक्रमण और बीमारियां दूर रहती हैं. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार माता शीतला को चेचक और अन्य संक्रामक रोगों की देवी माना जाता है. इसलिए लोग अपने बच्चों और परिवार की अच्छी सेहत के लिए माता की पूजा करते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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