ईरान की नाकेबंदी से दुनिया परेशान… हॉर्मुज से शान से निकला हिंदुस्तान! इन देशों को भी मिली छूट
TV9 Bharatvarsh March 22, 2026 10:42 AM

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अब एक बड़े वैश्विक ऊर्जा संकट का रूप लेता जा रहा है. अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ ईरान की तनातनी ने एक ऐसे जलमार्ग को लगभग बंद कर दिया है, जिस पर दुनिया के कच्चे तेल की आपूर्ति काफी हद तक निर्भर है. मार्च की शुरुआत में हुए अमेरिकी हमलों के बाद से ईरान ने ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से होने वाले व्यापारिक यातायात पर अघोषित नाकेबंदी कर दी है. इसके कारण दुनिया भर में तेल की कीमतों में आग लगने का डर पैदा हो गया है, जिसका सीधा असर एक आम नागरिक की जेब और पेट्रोल-डीजल के बिल पर पड़ सकता है. लेकिन इस भयावह वैश्विक संकट के बीच भारत ने अपनी शानदार कूटनीतिक ताकत का जो प्रदर्शन किया है, वह वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती ताकत को साबित करता है.

भारत के कूटनीतिक दबदबे की जीत

हॉर्मुज जलडमरूमध्य कोई आम समुद्री रास्ता नहीं है. दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल और गैस यहीं से होकर गुजरता है. ईरान ने साफ कर दिया है कि यह जलमार्ग अमेरिका और उसके सहयोगियों को छोड़कर सबके लिए खुला है, लेकिन हमलों के बढ़ते जोखिम के कारण यहां जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है. एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, 1 से 15 मार्च के बीच इस रास्ते से सिर्फ 90 जहाज ही गुजर सके हैं. दुनिया के कई ताकतवर देश इस रास्ते का उपयोग करने के लिए तरस रहे हैं, लेकिन भारत का रुतबा यहां सबसे अलग नजर आता है. भारत के दो एलपीजी (LPG) टैंकरों को ईरानी अधिकारियों ने पश्चिमी भारत के बंदरगाहों की ओर सुरक्षित निकलने की अनुमति दे दी है. यह भारत की उस मजबूत विदेश नीति का परिणाम है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना जानती है.

ईरान ने दी ‘वीआईपी’ एंट्री

जब दुनिया के बड़े-बड़े देश अपने जहाजों को निकालने के लिए कूटनीतिक रास्ते तलाश रहे थे, तब भारत ने सीधे शीर्ष स्तर पर संवाद किया. 12 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई अहम बातचीत के बाद स्थिति भारत के पक्ष में स्पष्ट हो गई. उस वक्त हॉर्मुज के पश्चिमी हिस्से में 24 जहाज फंसे हुए थे. भारत सरकार के जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा और भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने भी अलग-अलग इस बात की पुष्टि की है कि भारतीय जहाजों को आसानी से निकलने दिया जा रहा है. रॉयटर्स की ताजा रिपोर्ट बताती है कि ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ नाम के दो और भारतीय एलपीजी टैंकर इस रास्ते से गुजरने की तैयारी कर रहे हैं. वर्तमान में ये संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शारजाह के पास लंगर डाले हुए हैं.

इन देशों को भी मिली राहत

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट की घड़ी में ईरान जहाजों को मामले-दर-मामले (case by case) के आधार पर ही निकलने की मंजूरी दे रहा है. 1 से 15 मार्च के बीच जो 90 जहाज इस जलमार्ग से गुजरे, उनमें ईरान से जुड़े जहाजों के अलावा मुख्य रूप से भारत, चीन और पाकिस्तान के झंडे वाले जहाज शामिल थे. चीन को भी इस रास्ते से गुजरने के लिए एक तरह से ‘ग्रीन सिग्नल’ मिला हुआ है. वहीं, ‘कराची’ नामक एक पाकिस्तानी तेल टैंकर ने भी 15 मार्च को सफलतापूर्वक इस जलमार्ग को पार किया. तुर्की को भी बड़ी मशक्कत के बाद अपने 15 में से केवल एक जहाज को निकालने की अनुमति मिल सकी है.

जापान, फ्रांस और इटली भी लगा रहे गुहार

ईरान के इस सख्त रवैये ने दुनिया के विकसित देशों को भी चिंता में डाल दिया है. जापान जैसा आर्थिक रूप से संपन्न देश भी अब अपने जहाजों को निकालने के लिए ईरान से बातचीत कर रहा है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जापानी समाचार एजेंसी क्योडो को बताया है कि वे टोक्यो के साथ बातचीत कर रहे हैं. सिर्फ जापान ही नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया, फ्रांस और इटली जैसे देश भी ईरान के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि ऊर्जा संकट से बचने के लिए हॉर्मुज का रास्ता उनके लिए भी खुल सके.

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