चैत्र नवरात्रि के पावन मौके पर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के दौज्जा गांव में ऐसा चमत्कार हुआ, जिसे लोग सालों तक याद रखेंगे. 11 साल पहले लापता हुई 80 वर्षीय लीलावती, जिन्हें परिवार ने मृत मान लिया था और पिछले कई सालों से उनका श्राद्ध भी कर रहा था, अचानक जिंदा अपने घर लौट आईं. उनकी वापसी से पूरे गांव में खुशी और जश्न का माहौल है. परिवार के भी मां के लौट आने से फूले नहीं समा रहे हैं
लीलावती साल 2015 में अपने खेत पर गई थीं, लेकिन फिर कभी वापस नहीं लौटीं. उनकी मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण आशंका थी कि वे रास्ता भटक गई होंगी. परिवार ने उन्हें ढूंढने के लिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में तलाश की. साथ ही थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई और पोस्टर तक लगाए, लेकिन चार साल तक कोई सुराग नहीं मिला. आखिरकार परिवार ने उम्मीद छोड़ दी और उन्हें मृत मानकर श्राद्ध करना शुरू कर दिया.

इधर, लीलावती भटकते हुए जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र तक पहुंच गई थीं. वहां भारतीय सेना और जम्मू पुलिस ने उन्हें लावारिस हालत में पाया. उनकी देखभाल की गई और पहचान जानने की कोशिश शुरू हुई. काफी प्रयासों के बाद उनकी जानकारी उत्तर प्रदेश के बागपत पुलिस तक पहुंचाई. जब परिजनों को सूचना मिली तो पहले उन्हें यकीन ही नहीं हुआ. बाद में सेना के अधिकारियों ने वीडियो कॉल के जरिए लीलावती को दिखाया, जिसके बाद परिवार भावुक हो उठा.

उनके बेटे और अन्य परिजन तुरंत सुरनकोट पहुंचे और उन्हें अपने साथ घर ले आए. घर लौटते ही मानो खुशियों का सैलाब उमड़ पड़ा. पूरे गांव में मिठाइयां बांटी गईं, डीजे बजाया गया और लोग इस चमत्कारी वापसी का जश्न मनाने लगे. परिवार के लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि लीलावती दोबारा जिंदा मिलेंगी. उनके पौत्र बिल्लू ने बताया कि चार साल तक लगातार तलाश करने के बाद जब कोई जानकारी नहीं मिली, तो उन्हें मृत मान लिया गया.
पिछले सात साल से श्राद्ध किया जा रहा था. अब दादी को अपने बीच पाकर पूरा परिवार बेहद खुश और भावुक है. यह कहानी न सिर्फ उम्मीद की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कभी-कभी चमत्कार सच में होते हैं.