नई दिल्ली: अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो यह खबर सीधे आपकी जेब से जुड़ी है। 1 अप्रैल 2026 से नया वित्तीय वर्ष शुरू हो रहा है और इसी के साथ आपकी पे-स्लिप (Salary Slip) का पूरा गणित बदलने वाला है। केंद्र सरकार नया आयकर अधिनियम 2025 (New Income Tax Act 2025) और नया लेबर कोड (Labour Code) लागू करने की तैयारी में है, जिसका सीधा असर आपके बैंक अकाउंट में आने वाली ‘टेक होम सैलरी’ पर पड़ेगा।
क्या है नया नियम और बेसिक सैलरी का गणित?नए लेबर कोड के तहत अब कंपनियों के लिए एक बड़ा बदलाव अनिवार्य हो जाएगा। नियम कहता है कि आपकी बेसिक सैलरी (Basic Pay) आपकी कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए। फिलहाल, कई कंपनियां टैक्स बचाने के चक्कर में बेसिक सैलरी को काफी कम (जैसे 20-30%) रखती हैं और बाकी हिस्से को HRA, ट्रैवल और स्पेशल अलाउंस जैसे भत्तों में बांट देती हैं। 1 अप्रैल के बाद कंपनियां भत्तों को कुल सैलरी के 50% से ज्यादा नहीं रख पाएंगी।
आपकी इन-हैंड सैलरी पर क्या होगा असर?इस बदलाव का सबसे बड़ा असर आपके पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा। चूंकि पीएफ का कैलकुलेशन बेसिक सैलरी के आधार पर होता है, इसलिए बेसिक पे बढ़ते ही आपके रिटायरमेंट फंड में योगदान बढ़ जाएगा। जब पीएफ के लिए पैसा ज्यादा कटेगा, तो मुमकिन है कि महीने के आखिर में आपके हाथ में आने वाली (In-hand) सैलरी थोड़ी कम हो जाए।
हालांकि, यह आपकी मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी कुल सैलरी 50,000 रुपये है और बेसिक पे पहले से ही 25,000 रुपये है, तो आप पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर आपकी बेसिक पे सिर्फ 10,000 रुपये थी और बाकी अलाउंस थे, तो कंपनी को आपकी बेसिक पे बढ़ाकर 25,000 करनी होगी, जिससे आपका पीएफ कट अधिक हो जाएगा।
टैक्स की देनदारी और HRA का पेंचबेसिक सैलरी बढ़ने से कुछ कर्मचारियों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। दरअसल, पुरानी टैक्स व्यवस्था में HRA की छूट आपकी बेसिक सैलरी पर टिकी होती है। बेसिक पे बढ़ने से किराए में मिलने वाली छूट का दायरा कम हो सकता है। ऐसे में 10 से 30 लाख रुपये की आय वाले लोग, जो मेट्रो शहरों में रहते हैं या जिनका होम लोन चल रहा है, उन्हें टैक्स बचाने के लिए 80C और NPS जैसी योजनाओं का सहारा लेना पड़ सकता है।
न्यू टैक्स रिजीम वालों के लिए राहत की बातअगर आपने नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) चुनी है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। न्यू टैक्स रिजीम में अब 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आय टैक्स फ्री कर दी गई है। इसमें HRA या अन्य भत्तों पर छूट का झंझट नहीं है। 75,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन को मिलाकर, यदि आपकी सालाना कमाई 12.75 लाख तक है, तो आपको ‘जीरो टैक्स’ देना होगा। ऐसे में बेसिक सैलरी बढ़ने से आपके टैक्स पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।