दुनियाः ट्रंप का दावा- 'सम्मानित' ईरानी नेता से बातचीत जारी, तेहरान का इनकार और किम की सत्ता बरकरार
Navjivan Hindi March 24, 2026 02:43 AM
ट्रंप का दावा- 'सम्मानित' ईरानी नेता से बातचीत जारी, तेहरान का इनकार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान एक ‘‘समझौता करना चाहता है’’ और अमेरिकी दूत एक "सम्मानित" ईरानी नेता के साथ बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, ईरान ने इससे इनकार किया है। ट्रंप ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि पश्चिम एशिया के लिए उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने रविवार शाम को बातचीत की।ट्रंप ने तेहरान का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी अधिकारी या अधिकारियों का नाम नहीं लिया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई से बात नहीं की है।

ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता हो जाता है, तो अमेरिका ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण संवर्धित यूरेनियम को अपने कब्जे में लेने के लिए कदम उठाएगा। इससे पहले ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों से सकारात्मक बातचीत जारी है और इसे देखते हुए उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग को ईरान के बिजली और उर्जा संयंत्रों पर अगले पांच दिन तक किसी तरह के सैन्य हमले नहीं करने का आदेश दिया है। हालांकि, ट्रंप के इस दावे का भी ईरान ने फौरन खंडन किया और कहा कि तेहरान की कड़ी चेतावनी से डरकर ट्रंप पीछे हटे हैं।

किम के हाथों में फिर एक बार नॉर्थ कोरिया की कमान

उत्तर कोरिया की कमान एक बार फिर किम जोंग-उन के हाथ में आ गई है। नॉर्थ कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, रविवार को हुए सुप्रीम पीपल्स असेंबली के पहले सत्र में किम को आयोग के सबसे ऊंचे पद पर फिर से नियुक्त किया गया। 2016 में देश की टॉप पॉलिसी गाइडेंस बॉडी के तौर पर कमीशन बनने के बाद से यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है।

इससे पहले, नॉर्थ कोरिया के लीडर किम जोंग-उन को पिछले महीने हुई रूलिंग पार्टी कांग्रेस के बाद सुप्रीम पीपल्स असेंबली (एसपीए) के पहले सेशन में 'स्टेट अफेयर्स कमीशन' का प्रेसिडेंट फिर से नियुक्त किया गया। कोरियन सेंट्रल न्यू एजेंसी (केसीएनए) ने बताया कि किम को 15वें एसपीए के पहले सत्र के पहले दिन स्टेट अफेयर्स कमीशन का प्रेसिडेंट फिर से अपॉइंट किया गया। केसीएनए के मुताबिक, बैठक के दौरान, जो योंग-वोन, जिन्हें किम के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक माना जाता है, को भी एसपीए स्टैंडिंग कमेटी का चेयरमैन चुना गया, जो संसद का सबसे बड़ा पद है, और उन्होंने चोई रयोंग-हे की जगह ली।

नॉर्थ कोरिया आमतौर पर पार्टी कांग्रेस के बाद रबर-स्टैम्प पार्लियामेंट का एक सत्र बुलाता है ताकि कांग्रेस में लिए गए फैसलों को लागू करने के लिए जरूरी कानून बनाए जा सकें। यह नियुक्ति रविवार को एसपीए के पहले सत्र में की गई, जो इसके 15वें टर्म की पहली स्टेट अफेयर्स एक्टिविटी थी। प्रीमियर पाक थाए-सोंग ने अपना पद बरकरार रखा, जबकि पूर्व प्रीमियर किम टोक-हुन को पहला वाइस प्रीमियर नियुक्त किया गया, यह पद हाल ही में हुई बैठक में बनाया गया था। इस फेरबदल में, जो को स्टेट अफेयर्स कमीशन का उपाध्यक्ष भी नियुक्त किया गया, जबकि किम की ताकतवर बहन किम यो-जोंग को आयोग के सदस्य के पद से हटा दिया गया। किम की ताकतवर बहन, किम यो जोंग, देश की सबसे बड़ी लीडरशिप बॉडी, स्टेट अफेयर्स कमीशन के सदस्यों की केसीएनए लिस्ट से गायब थीं, जिस पर वह 2021 से काबिज थीं। उत्तर कोरिया के तीसरी पीढ़ी के नेता के तौर पर, किम ने 2011 में अपने पिता के निधन के बाद से न्यूक्लियर हथियारों से लैस देश पर शासन किया है। देश की स्थापना 1948 में उनके दादा, किम इल सुंग ने की थी।

स्पेनिश पीएम को 'शुक्रिया' अदा करते हुए ईरान ने इजरायल पर दागीं मिसाइलें

अमेरिका-इजरायल के साथ संघर्ष के 24वें दिन चर्चा में ईरान का वो संदेश है जो हथियारों पर लिखकर दुश्मन देश तक पहुंचाया गया। रविवार को ईरान ने इजरायल के बड़े शहरों को निशाना बनाया। जिन बैलिस्टिक मिसाइल्स का प्रयोग किया गया, वे संदेशे में लिपटी थीं। ईरानी स्टेट मीडिया ने इसकी जानकारी दी है। तस्नीम और मेहर न्यूज एजेंसी ने कुछ पोस्टर प्रकाशित किए। इनमें से एक पर स्पेनिश पीएम पेड्रो सांचेज की तस्वीर चस्पा है। अंग्रेजी और फारसी भाषाओं में उनका बयान 'से नो टू वार' अंकित है। अंग्रेजी में लिखा है 'थैंक्यू प्राइम मिनिस्टर' साथ ही ये भी कि ये युद्ध न सिर्फ 'अमानवीय' है बल्कि 'अवैध' भी है। मेहर न्यूज एजेंसी ने जो खबर प्रकाशित की है उसमें आईआरजीसी सैन्यकर्मी मिसाइलों पर स्टिकर लगाते देखे जा सकते हैं।

दरअसल, हाल ही में सांचेज ने कहा था कि स्पेन की नीति 'युद्ध के खिलाफ' है। उन्होंने अमेरिका-इजरायल हमलों को 'गैरकानूनी' और 'खतरनाक' बताया था। कथित तौर पर ईरान के सैनिकों ने इन मिसाइलों को लॉन्च करते समय नारे भी लगाए। इससे साफ है कि यह सिर्फ हमला नहीं, बल्कि एक तरह का संदेश देने की कोशिश भी थी कि दुनिया के कुछ मुल्क ईरान के साथ हैं, संघर्ष अमानवीय है, यूरोप इन हमलों से खुश नहीं है, और युद्ध मसले का हल नहीं है।

संघर्ष शुरू होने के बाद स्पेन ने अमेरिका को अपने ‘रोटा नेवल बेस’ और ‘मोरन एयर बेस’ का इस्तेमाल करने से मना कर दिया था। इससे नाराज होकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पेन को व्यापारिक रिश्ते खत्म करने की धमकी दी। हाल ही में ब्रसेल्स में हुए यूरोपीय संघ के शिखर सम्मेलन में भी सांचेज ने दोहराया कि यह जंग पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईएई) प्रमुख फातिह बिरोल ने इस संघर्ष को दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में कहा कि अभी का हाल बहुत खराब है। यह ऐसा है जैसे एक साथ कई तेल और गैस का संकट एक साथ चल रहा है। अगर हालात ऐसे ही रहे, तो दुनिया का कोई भी देश इससे बच नहीं पाएगा। इस लड़ाई में कई तेल और गैस से जुड़े ठिकानों पर हमले हुए हैं, जिससे सप्लाई पर असर पड़ा है।

लंदन में यहूदियों की चार एम्बुलेंस को किया आग के हवाले

उत्तरी लंदन के गोल्डर्स ग्रीन इलाके में एक यहूदी समुदाय की आपातकालीन सेवा की चार एम्बुलेंस में आग लगा दी गई। स्थानीय मीडिया की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, पुलिस इस घटना को यहूदी विरोधी नफरती अपराध मान रही है। आग लगने की खबर मिलने के बाद सोमवार (स्थानीय समयानुसार) सुबह करीब 1.45 बजे मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अधिकारियों को हाईफील्ड रोड पर बुलाया गया। द गार्डियन के मुताबिक, अधिकारियों ने बाद में पुष्टि की है कि इस घटना की जांच एक लक्षित नफरती अपराध के तौर पर की जा रही है। लंदन फायर ब्रिगेड ने कहा कि आग पर काबू पाने के लिए छह फायर इंजन और करीब 40 फायरफाइटर लगाए गए, जिससे चार गाड़ियों को नुकसान हुआ। अधिकारियों ने आगे कहा कि आग लगने के दौरान एम्बुलेंस के अंदर कई सिलेंडर फट गए, जिससे पास की एक आवासीय बिल्डिंग की खिड़कियां टूट गईं। शुरुआती कार्रवाई में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

इलाके में पुलिसिंग की देखरेख करने वाली सुपरिंटेंडेंट सारा जैक्सन ने कहा, "हम जानते हैं कि इस घटना से लोगों में बहुत चिंता होगी और अधिकारी तुरंत जांच करने के लिए मौके पर मौजूद हैं।" द गार्डियन के मुताबिक, जैक्सन ने कहा, "हम सीसीटीवी की जांच कर रहे हैं और हमें ऑनलाइन फुटेज के बारे में पता है। हमें लगता है कि हम इस शुरुआती दौर में तीन संदिग्धों की तलाश कर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, और हम किसी से भी अपील करेंगे कि अगर उसके पास कोई जानकारी है तो वह जल्द से जल्द हमसे संपर्क करे; अगर आप चाहें तो बिना नाम बताए भी ऐसा कर सकते हैं।" जैक्सन ने आगे बताया कि पुलिस इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ाएगी। उन्होंने कहा, "हम धार्मिक नेताओं से बात करेंगे और स्थानीय इलाके में और पेट्रोलिंग करेंगे ताकि भरोसा दिलाया जा सके और लोगों की मौजूदगी साफ तौर पर दिखे।"

स्थानीय निगरानी समूह शोमरिम के अनुसार, सोमवार तड़के उन्हें जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। शोमरिम ने कहा, "धमाके ऑक्सीजन टैंक की वजह से हुए थे, बम या एक्सप्लोसिव डिवाइस की वजह से नहीं। हालांकि कुछ बिल्डिंग खाली करा ली गई हैं, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। जब तक जांच चल रही है, कृपया उस इलाके से बचें।" स्थानीय काउंसलर डीन कोहेन घटनास्थल पर स्थिति का जायजा लेने के लिए पहुंचे थे। हालात का जायजा लेने के बाद उन्होंने कहा कि इस घटना से वहां के लोग बहुत परेशान हैं। उन्होंने बताया कि "सिनेगॉग के कार पार्क में हुआ हमला बहुत डरावना है और ब्रिटेन में यहूदी विरोधी घटनाओं को लेकर पहले से ही बढ़े डर के समय में हमारे समुदाय के बीच और सदमा देगा।"

बता दें, यह घटना पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बाद बढ़े वैश्विक तनाव के बीच हुई है। इसकी शुरुआत 28 फरवरी को तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद हुई और बढ़ गई थी। ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के हमलों को कई ईरानियों ने समर्थन किया, वहीं इसे लेकर लंदन में भी बड़े पैमाने पर प्रोटेस्ट भी हुए। इससे पहले शनिवार को, हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। ये प्रदर्शनकारी ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायली सैन्य एक्शन का विरोध करते हुए पूरे यूरोप में हो रहे विरोध की बड़ी लहर में शामिल हो गए। लंदन में शनिवार को रसेल स्क्वायर से व्हाइटहॉल तक प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने मार्च किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी बैनर लहराते हुए और हमलों की आलोचना करते हुए नारे लगा रहे थे। बाद में इसी दिन एक रैली में हिस्सा लेने वालों ने तुरंत सीजफायर और मिडिल ईस्ट में विदेशी दखल खत्म करने की मांग की।

इमरान खान ने न्यायाधीशों पर 'अपनी आत्मा बेचने' का आरोप लगाया

पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोमवार को देश के न्यायाधीशों पर "व्यक्तिगत लाभ के लिए अपनी आत्मा बेचने" का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें और उनकी पत्नी को अदालतों से न्याय नहीं मिल रहा है। इमरान खान (73) अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं और वर्तमान में उनके खिलाफ कई मामलों में उन्हें रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल में रखा गया है।

'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (पीटीआई) पार्टी के संस्थापक खान ने ईद के मौके पर अपने बेटे के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में ये आरोप लगाए। उनके बेटे ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया मंच 'एक्स’ अकाउंट पर इसे पोस्ट किया। उनके बेटे कासिम खान ने कहा कि उनके पिता चाहते थे कि उनका संदेश जनता तक पहुंचे। पोस्ट में खान के हवाले से कहा गया, "इस देश के न्यायाधीशों को शर्म आनी चाहिए। हम बार-बार न्यायपालिका के पास गए हैं। लेकिन उन्होंने अपने निजी लाभ के लिए अपनी आत्मा बेच दी है। उन्होंने अपनी ईमानदारी बेच दी है।"

देश के शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए खान ने कहा, "वे जानते हैं कि मुझे तोड़ नहीं सकते, इसलिए वे मेरी पत्नी को निशाना बना रहे हैं। वे मुझे ब्लैकमेल करने के लिए बुशरा बीबी (मेरी तीसरी पत्नी) के साथ इस अमानवीय व्यवहार की अनुमति कैसे दे सकते हैं? वह दिन के 24 घंटे अलग-थलग रहती हैं, सिवाय हफ्ते में एक दिन मेरे साथ 30 मिनट के मिलने के और वह समय भी अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।" खान ने कहा, "महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को नुकसान पहुंचाना "गैर-इस्लामिक है और उनके इरादे साफ व स्पष्ट हैं।" खान ने कहा, "समाज में न्याय की जिम्मेदारी न्यायाधीशों की होती है। उन्हें अपने आप पर शर्म आनी चाहिए।"

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