1 अप्रैल से ऑनलाइन पेमेंट के बदलेंगे नियम, अब फ्रॉड होने पर बैंक भरेंगे आपका नुकसान!
TV9 Bharatvarsh March 24, 2026 12:43 PM

आजकल सब्जी वाले से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, हर जगह हम अपने स्मार्टफोन से ही पेमेंट करना पसंद करते हैं. डिजिटल लेनदेन ने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है. लेकिन इस सुविधा के साथ-साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड का डर भी हर वक्त सताता रहता है. आम आदमी की इसी चिंता को दूर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. 1 अप्रैल 2026 से देश भर में ऑनलाइन पेमेंट का पूरा ढांचा बदलने जा रहा है. अब आपके खून-पसीने की गाढ़ी कमाई पर साइबर अपराधी आसानी से हाथ साफ नहीं कर पाएंगे.

क्या है नया 2FA नियम?

रिजर्व बैंक के नए निर्देशों के मुताबिक, अब किसी भी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को पूरा करने के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अनिवार्य होगा. आसान भाषा में समझें तो, पेमेंट को कन्फर्म करने के लिए आपको कम से कम दो सुरक्षा पैमानों से गुजरना होगा. इसके लिए आप पासवर्ड, पिन, ओटीपी या फिर बायोमेट्रिक (जैसे फिंगरप्रिंट और फेस आईडी) का इस्तेमाल कर सकेंगे. इसमें सबसे अहम बात यह है कि इनमें से कोई एक तरीका ‘डायनामिक’ होना चाहिए, यानी ऐसा पासवर्ड या कोड जो हर बार नया हो. इस नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि अगर किसी जालसाज के हाथ आपकी कोई एक जानकारी लग भी जाए, तो भी वह आपके खाते से पैसे न निकाल सके.

ओटीपी पर क्यों खत्म हुआ भरोसा?

बीते कुछ वर्षों में देश में डिजिटल पेमेंट के ग्राफ ने तेजी से छलांग लगाई है. लेकिन इसके समानांतर ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग और बिना अनुमति के होने वाले ट्रांजैक्शन के मामले भी बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं. अब तक हमारा सिस्टम मुख्य रूप से ओटीपी (OTP) पर निर्भर था. लेकिन तकनीक के इस दौर में हैकर्स ने ओटीपी चुराने के कई नए और खतरनाक तरीके निकाल लिए हैं. अब सिर्फ एक मैसेज के भरोसे आपकी जमापूंजी को नहीं छोड़ा जा सकता. इसी खतरे को भांपते हुए केंद्रीय बैंक ने ज्यादा मजबूत और सुरक्षित सिस्टम लागू करने का यह फैसला लिया है.

पैसा कटा तो ग्राहक नहीं, बैंक झेलेंगे नुकसान

इस नई गाइडलाइन का सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ता को मिलने वाला है. अगर किसी ट्रांजैक्शन के दौरान तय किए गए सुरक्षा नियमों में कोई चूक होती है और किसी ग्राहक के साथ फ्रॉड हो जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर बैंक या उस पेमेंट कंपनी (फिनटेक) की होगी. ऐसे हालात में ग्राहक को कोई आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा, बल्कि संबंधित संस्था को सारा पैसा वापस करना होगा. यह कड़ा नियम बैंकों और पेमेंट कंपनियों पर दबाव बनाएगा कि वे अपने सुरक्षा तंत्र को और ज्यादा अभेद्य बनाएं.

लेनदेन की रकम तय करेगी सुरक्षा का स्तर

कड़ी सुरक्षा के साथ-साथ लोगों की सुविधा का भी पूरा खयाल रखा गया है. रिजर्व बैंक ने ‘रिस्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन’ की शुरुआत की है. इसका सीधा सा मतलब यह है कि हर ट्रांजैक्शन पर एक जैसी सख्ती नहीं होगी. अगर आप रोजमर्रा के छोटे-मोटे पेमेंट कर रहे हैं, तो कम वेरिफिकेशन में भी काम चल जाएगा. वहीं, अगर रकम बड़ी है या कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आती है, तो सिस्टम अतिरिक्त सुरक्षा जांच की मांग करेगा. इतना ही नहीं, यह नियम सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहेगा. 1 अक्टूबर 2026 तक इसे अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर भी लागू कर दिया जाएगा, जिससे विदेशों में होने वाले भुगतान भी पूरी तरह सुरक्षित हो जाएंगे.

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