पेट्रोल-डीजल की किल्लत की अफवाह से मध्यप्रदेश के कई जिलों में लगातार पेट्रोल-पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सरकार और प्रशासन की लगातार अपील के बाद भी हालात पैनिक होते नजर आ रहे है। देवास, इंदौर, आगर मालवा, बड़वानी, झाबुआ जेसे जिलों में लगातार लोग पेट्रोल पंप पर पहुंच रहे है और अपनी गाड़ियों को फुल कराने के साथ ड्रम और पीपों में पेट्रोल-डीजल लेने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
वहीं राजधानी भोपाल में हालात सामान्य है, हलांकि कुछ पेट्रोल-पंपों पर सुबह-सुबह लोगों की भीड़ देखी गई। वहीं भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि भोपाल जिले में डीज़ल, पेट्रोल एवं घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है, अफवाहों पर ध्यान न दे। किसी भी प्रकार की घबराहट या अनावश्यक खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है।
क्या मध्यप्रदेश में वकाई में पेट्रोल-डीजल की कोई किल्लत है या केवल अफवाहों के कारण पेट्रोल-पंपों पर भीड़ उमड़ रही है, इसको लेकर 'वेबदुनिया' ने मध्यप्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह से जमीनी हालात को लेकर सीधी बात की। अजय सिंह कहते हैं कि मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और कई कोई कमी या किल्लत नहीं है। पेट्रोल-डीजल के स्टॉक में कहीं कोई कमी नहीं है और न सप्लाई में कोई दिक्कत है। लोग केवल अफवाह के चलते पैनिक हो रहे है और बड़ी संख्या में पेट्रोल पंपों पर पहुंच रहे है। वह कहते हैं कि अफवाहों को रोकने में मीडिया और प्रशासन को अपनी भूमिका निभानी पड़ेगी।
पेट्रोल-डीजल की जमाखोरी पर सख्त हो प्रशासन-प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल-पंपों पर पैनिक हालात को लेकर अजय सिंह कहते हैं कि जिस तरह से लोग पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों के साथ ड्रम, पीपे और कुपियां लेकर आ रहे है,ऐसे अवैध भंडारण वालों को प्रतिबंधित करना चाहिए जिससे जमाखोरी पर लगाम लग सके। वह कहते हैं कि नियमों के मुताबिक ट्रैंक कैपिसिटी से ज्यादा पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जा सकता और खुले में पेट्रोल-डीजल का संग्रहण करना अपराध है। ऐसा देखा जा रहा है कि कई पंपों पर लोगों टैंक फुल कराने के साथ पांच-पांच लीटर की कैन में पेट्रोल ले जा रहे है जो अपराध है।
क्यों पेट्रोल-पंप हो रहे ड्राई?-वहीं प्रदेश के कई पेट्रोल पंपों के ड्राई होने यानि बंद होने की खबरों पर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह कहते हैं कि इसके पीछे एक बड़ा कारण है कंपनियों की ओर से पेट्रोल पंपों को जो पेट्रोल-पंपों को दिए जाने वाले पेट्रोल-पंपों के नियमों में बदलाव है। युद्ध शुरु होने से पहले कंपनी पेट्रोल-पंपों को 4 दिन के क्रेडिट पर पेट्रोल-डीजल देती थी लेकिन वॉर शुरु होने के बाद कंपनी यह सुविधा बंद कर दी। ऐसे में पेट्रोल-पंपों मालिकों को पिछला बकाया भी देना है और आगे की सप्लाई के लिए एंडवास भी देना है। इस कारण जो पेट्रोल पंप ऑनर्स की तरफ से कंपनी को पेमेंट नहीं दिया गया उनको पेट्रोल-डीजल नहीं मिल रहा है। इस कारण पेट्रोल पंप ड्राई हो गए है और वहां स्टॉक खत्म हो गया है।
अजय सिंह कहते हैं कि जिस तरह के डिमांड में बढ़ोत्तरी हो रही है, ऐसे में आने वाले समय अगर सप्लाई में परेशानी आती है तो एसोसिशन की तरफ से कंपनियों की मांग की जाएगी कि डिपो में तीन शिफ्ट में काम किया जाए जिससे ऑर्डर पूरे हो जाए और सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं हो।