Maa Siddhidatri Katha And Aarti: आज चैत्र नवरात्रि का 9वां यानी अंतिम दिन है. इसे नवमी और महानवमी कहा जाता है. आज इस पावन पर्व का समापन हो जाएगा. आज राम नवमी भी है. नवरात्रि के पर्व में महानवमी का विशेष महत्व माना गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन कन्या पूजन किया जाता है. नवरात्रि का महानवमी का दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित किया गया है.
सिद्धिदात्री माता को देवी दुर्गा का नौवां स्वरूप माना जाता है. मां को सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी कहा गया है. महानवमी के दिन विधि-विधान से माता सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है. मां की पूजा करने से सभी बिगड़े काम बनते हैं. महानवमी पर पूजा के समय सिद्धिदात्री माता की कथा और आरती का पाठ जरूर करना चाहिए. मान्यता है कि कथा और आरती पढ़ने से मां प्रसन्न होकर सभी इच्छा पूरी करती हैं, तो आइए पढ़ते हैं कथा और आरती.
मांं सिद्धिदात्री की कथाधार्मिक मान्यता है कि असुरों के अत्याचारों से परेशान होकर एक बार सभी देवता भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास गए. तब तीनों देवताओं ने अपने तेज से एक दिव्य शक्ति को उत्पन्न किया. इनको ही माता सिद्धिदात्री के रूप में जाना गया. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या की. मां का कठोर तप करने से भगवान को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हुईं.
मान्यता है कि माता सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर नारी का हो गया. इसके बाद वो वे अर्धनारीश्वर कहलाए. मां को सिद्धियों की दाता कहा जाता है. माता सिद्धिदात्री अपने भक्तों को अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व जैसी आठ प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं. माता सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं, वे कमल पुष्प पर आसीन होती हैं और उनका वाहन सिंह है.
सिद्धिदात्री माता की आरतीजय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में न कोई विधि है
तू जगदंबे दाती तू सर्वसिद्धि है
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तू सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उस के रहे न अधूरे
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महानंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता..
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.