इजरायल और अमेरिका के साथ चल रही जंग के बीच ईरान ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के होटल मालिकों पर हमले करने की चेतावनी दी है. उसका कहना है कि इन होटलों में अमेरिकी सैनिक को ठहराया जा रहा है. उसने इन होटल मालिकों को अल्टीमेटम दिया है कि ये होटल उसकी सैन्य कार्रवाई का निशाना बन सकते हैं.
न्यूज एजेंसी 'फार्स' की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ ईरानी और उसके सहयोगी उग्रवादी समूहों के साथ जॉइंट ऑपरेशन के चलते अमेरिकी सैनिक गल्फ देशों के होटलों में ठहरे हैं. इन हमलों में पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया था.
समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' की रिपोर्ट के अनुसार, यह चेतावनी उन सभी ठिकानों पर लागू होती है जो विदेशी सैन्य कर्मियों को पनाह देते हैं, और अगर ऐसी गतिविधियां जारी रहती हैं तो यह चेतावनी तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी.
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सैनिकों ने पूरे क्षेत्र में नागरिक स्थलों पर अपनी मौजूदगी बना ली है. इनमें बेरूत के पुराने एयरपोर्ट के पास एक लॉजिस्टिक्स बेस और दमिश्क के 'रिपब्लिक पैलेस', 'फोर सीजन्स' और 'शेरेटन' होटलों में चलाई जा रहीं सलाहकार गतिविधियां शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इस हफ्ते अमेरिकी मरीन सैनिकों को इस्तांबुल और सोफिया के रास्ते जिबूती अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भेजा गया है.
इससे पहले, गुरुवार (26 मार्च, 2026) को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने खाड़ी अरब देशों के होटलों को अमेरिकी सैन्य कर्मियों को स्वीकार न करने की चेतावनी दी थी. उन्होंने इन सैनिकों पर अपने ठिकानों से भागने और नागरिक स्थलों को अपनी ढाल (कवर) के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.
सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, 'इस युद्ध की शुरुआत से ही, अमेरिकी सैनिक जीसीसी (खाड़ी सहयोग परिषद) के सैन्य ठिकानों से भागकर होटलों और दफ्तरों में छिप गए हैं. वे जीसीसी के नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.'
उन्होंने इस स्थिति की तुलना संयुक्त राज्य अमेरिका के होटलों से की, जहां उनके दावे के अनुसार, ऐसे अधिकारियों को बुकिंग देने से मना कर दिया जाता है जिनसे ग्राहकों को खतरा हो सकता है. उन्होंने खाड़ी के होटलों से भी इसी तरह की नीति अपनाने का आग्रह किया है.