कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों के बीच हालात ठीक नहीं हैं। चुनावी राज्यों तमिलनाडु और पुडुचेरी में सीटों के बंटवारे को लेकर डीएमके के साथ विवाद उत्पन्न हुआ है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच भी मतभेद उभर रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुस्लिम नेता आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा से मुलाकात की, जिससे सपा के नेताओं में नाराजगी पैदा हुई है। इसके अलावा, उन राज्यों में भी कांग्रेस के विवाद बढ़ रहे हैं, जहां चुनाव नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस या उसकी सहयोगी पार्टियों की सरकारें हैं। इन विवादों को चुनाव से जोड़ा जा सकता है, क्योंकि कांग्रेस की नाराजगी उन पार्टियों से है, जो वर्तमान चुनावों में कांग्रेस से अलग लड़ रही हैं या जिनका कांग्रेस के साथ सीधा मुकाबला है।
झारखंड में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। राहुल गांधी ने अपने करीबी सहयोगी और पूर्व आईएएस अधिकारी के राजू को झारखंड का प्रभारी नियुक्त किया है। राजू ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें कहा गया है कि सरकार की देखरेख में अवैध खनन का कार्य हो रहा है। ऐसे आरोप आमतौर पर भाजपा लगाती है, लेकिन कांग्रेस की ओर से ऐसे आरोप लगाना दोनों पार्टियों के बीच विवाद को और बढ़ा सकता है। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में जेएमएम ने कांग्रेस से तालमेल की इच्छा जताई थी, लेकिन कांग्रेस ने कोई सीट नहीं दी, जिसके बाद जेएमएम ने बिहार चुनाव से खुद को अलग कर लिया।
अब हेमंत सोरेन इसका प्रतिशोध ले रहे हैं। हेमंत की पार्टी असम में चुनाव लड़ रही है। हाल ही में हेमंत प्रचार के लिए असम गए थे। चुनाव की घोषणा से पहले असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई और प्रभारी जितेंद्र सिंह ने हेमंत से मुलाकात की थी, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद हेमंत सोरेन चुनावी मैदान में उतर गए। कांग्रेस की नाराजगी इस बात को लेकर है कि झारखंड से सटे पश्चिम बंगाल में हेमंत चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। यदि जेएमएम झारखंड से सटे क्षेत्रों, विशेषकर बांकुड़ा, पुरुलिया, और झारग्राम में चुनाव लड़ती, तो ममता बनर्जी को नुकसान हो सकता था। लेकिन हेमंत असम में चुनाव लड़ने पहुंचे हैं, जहां उनके चुनावी अभियान से कांग्रेस को नुकसान होगा।
इसी तरह, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के खिलाफ विवाद खड़ा किया है सीपीएम ने, जो केरल में कांग्रेस के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा में है। हालांकि, तमिलनाडु में कांग्रेस और सीपीएम दोनों एक ही गठबंधन का हिस्सा हैं। हिमाचल प्रदेश में सीपीएम ने कांग्रेस की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सीपीएम का कहना है कि कांग्रेस सरकार वन और पर्यावरण सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन कर रही है और जमीन के पट्टे बांट रही है। यह विवाद सोलन के चेस्टर हिल हाउसिंग प्रोजेक्ट से संबंधित है। सीपीएम ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार एक निजी रियल एस्टेट कंपनी को 275 बीघा जमीन कानूनों का उल्लंघन करके आवंटित कर रही है। इस मामले में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया गया है। सीपीएम द्वारा यह मुद्दा उठाने के बाद राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा को भी इस पर प्रतिक्रिया देने का मौका मिला है। हिमाचल की कांग्रेस सरकार पहले से ही राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर विवादों में घिरी हुई है।