मालदा में ज्यूडिशियल अफसरों के घेराव की जांच करेगी NIA, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर EC का फैसला
TV9 Bharatvarsh April 03, 2026 08:42 AM

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सात न्यायिक अधिकारियों (ज्यूडिशियल अफसर) के घेराव की जांच को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंप दी है. दिल्ली में चुनाव आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि एनआईए की एक टीम शुक्रवार (आज) को राज्य में मौजूद रहेगी.

पश्चिम बंगाल को सबसे अधिक ध्रुवीकरण वाला राज्य बताते हुए, सुपीम कोर्ट ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान मालदा जिले में ज्यूडिशियल अफसरों के घेराव और हमले पर प्रशासन की विफलता और निष्क्रियता पर कड़ी नाराजगी जताई और सीबीआई या एनआईए से जांच कराए जाने का निर्देश दिया.

चुनाव आयोग ने एनआईए को लिखा पत्र

चुनाव आयोग ने दो अप्रैल (गुरुवार) को एनआईए को लिखे पत्र में न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए उसे बुधवार की घटना की जांच करने का निर्देश दिया. घेराव की घटना की कड़ी निंदा करते हुए न्यायालय ने कहा कि यह घटना राज्य प्रशासन की विफलता को भी उजागर करती है और ज्यूडिशियल अफसरों को धमकाने का न सिर्फ एक बेशर्म प्रयास था, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को चुनौती देने के बराबर भी था.

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होंगे. यह घटना मालदा जिले के कालियाचक इलाके में एसआईआर कवायद के दौरान हुई जब असामाजिक तत्वों ने बुधवार को एक खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यालय में अपराह्न साढ़े तीन बजे से सात ज्यूडिशियल अफसरों का घेराव किया. अधिकारियों ने बताया कि बुधवार आधी रात के आसपास सुरक्षा बलों ने उन ज्यूडिशियल अफसरों को मुक्त कराया, जिनका घेराव किया गया था.

पुलिस ने 17 लोगों को किया गिरफ्तार

सात ज्यूडिशियल अफसरों के घेराव में कथित संलिप्तता के आरोप में पुलिस ने एक चुनाव उम्मीदवार सहित कम से कम 17 लोगों को गिरफ्तार किया. अधिकारी ने बताया कि इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और 16 अन्य लोगों को गिरफ्तार करके जिला अदालत में पेश किया गया और उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.

हमारे पास पुख्ता सबूत: पुलिस

पुलिस अधिकारी ने कहा, ये लोग मालदा में हुई घटना में शामिल थे. हमारे पास पुख्ता सबूत हैं. उनसे पूछताछ की जाएगी. गिरफ्तारी के बाद अली ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि उन्हें उनकी राजनीतिक संबद्धता के कारण फंसाया जा रहा है. अदालत में पेशी के दौरान उन्होंने कहा कि मुझे झूठा फंसाया गया है क्योंकि मैं आईएसएफ का उम्मीदवार हूं.

उन्होंने यह भी दावा किया कि घटना के समय वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे. उन्होंने कहा, मैं एक धार्मिक कार्यक्रम में गया था और घर लौट रहा था तभी मुझे गिरफ्तार कर लिया गया. मेरे खिलाफ साजिश है. पुलिस घटना की जांच कर रही है और आगे और गिरफ्तारयां होने की संभावना से इनकार नहीं किया है.

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