पश्चिम बंगाल में डेढ़ दशक पहले ममता बनर्जी ने जिस सिंगूर के सहारे अपनी राजनीति को परवान चढ़ाया था, उसकी सिंगूर से सहारे ही अब भाजपा ममता बनर्जी की घेराबंदी में जुट गई है। गुरुवार को सिंगूर पहुंच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि, सिंगूर की ज़मीन पर न खेती हो रही है और न ही कोई उद्योग स्थापित हुआ है। यह भूमि अब सीधे-सीधे राज्य सरकार की विफलता का प्रतीक बन चुकी है। अपने दौरे के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने सिंगूर में उस विवादित जमीन का भी निरीक्षण किया, जहां कभी टाटा मोटर्स का नैनो प्लांट प्रस्तावित था।
सिंगूर बना ममता दीदी की विफलता का स्मारक-केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सिंगूर का नाम सुनते ही टाटा फैक्ट्री आंदोलन याद आता है, जिसके सहारे ममता बनर्जी सत्ता तक पहुंचीं। लेकिन आज सिंगूर की हालत देखकर मैं हैरान रह गया। न वहां फैक्ट्री बनी, न जमीन खेती के लायक छोड़ी गई। जमीन के नीचे सीमेंट-कंक्रीट भरा पड़ा है और उसे हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि, दस साल बीत गए, लेकिन किसान आज भी वहीं खड़ा है। न खेती कर पा रहा है, न कोई उद्योग लगा। किसानों की आंखों में आंसू हैं, वो कह रहे हैं, हम तो कहीं के नहीं रहे। यह स्थिति ममता सरकार की नाकामी का जीता-जागता प्रमाण है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सिंगूर आज ममता बनर्जी की विफलता का स्मारक बन चुका है। ममता बनर्जी ने फैक्ट्री लगने नहीं दी और खेती भी नहीं होने दी। किसान को बीच मंझधार में छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि, यह किसानों के साथ विश्वासघात है। केवल सत्ता पाने के लिए किसानों की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया और बाद में उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, ममता दीदी को जनता या किसानों से कोई प्रेम नहीं है, उन्हें केवल कुर्सी से प्यार है। अगर जरा भी संवेदना होती, तो सिंगूर को एक मॉडल बनाकर दिखातीं, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
सिंगूर से क्या है ममता का सियासी कनेक्शन?-बंगाल की सियासत में सिंगूर आंदोलन के बाद ही ममता बनर्जी की सियासत को एक नया आयाम मिला था। सिंगूर में किसानों के समर्थन में सड़क पर उतरी ममता बनर्जी ने 34 साल के लेफ्ट के शासन को उखाड़ फेंका था। सिंगूर के किसानों के साथ-साथ प्रदेश की जनता के मन में ममता बनर्जी ने ऐसा प्रभाव छोड़ा कि 2011 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को बहुमत हासिल हुआ और बंगाल में पहली बार टीएमसी की सरकार बनी।
सिंगूर आंदोलन के दौरान ममता बनर्जी का कहना था कि सिंगूर में किसानों की जमीन पर उद्योग स्थापित नहीं होगा। आखिरकार उनका आंदोलन सफल हुआ और टाटा को यहां से वापस जाना पड़ा। 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने किसानों से जमीन लौटने का वादा किया था और बाद में किसानों को जमीन लौटाई भी गई। वहीं इस बार बंगाल चुनाव में भाजपा ने उसी सिंगूर से ममता बनर्जी को घेरने की रणनीति अपनाई और इसका आगाज गुरुवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंगूर से कर दिया है।