क्या है लीबिया मॉडल जो ईरान से चाहता है अमेरिका, इस्लामाबाद से लौटा खाली हाथ
TV9 Bharatvarsh April 12, 2026 02:42 PM

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चलने वाली शांति वार्ता USA की अवैध मांगों की वजह से फेल हो गई. ये बयान ईरान के विदेश मंत्रालय की तरफ से सामने आया. 21 घंटे तक चलने वाली बातचीत का कोई नतीजा क्यों नहीं निकला? आखिर इस्लामाबाद से अमेरिका को खाली हाथ वापस फिर से क्यों जाना पड़ा? इन सवालों को जवाब है वो लीबिया मॉडल, जिसे अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लागू करना चाहता है. ये मॉडल ईरान को पूरी तरह से पंगु बना देगा, जिसका नतीजा उसके लिए भयानक हो सकता है. ये एक ऐसी रणनीति है जिसका मकसद सैन्य बल के बजाय कूटनीतिक दबाव के ज़रिए तेहरान की परमाणु क्षमताओं को खत्म करना है.

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मीडिया से कहा था कि वह ईरान के साथ 2003 में लीबिया के साथ हुए समझौते जैसा ही एक समझौता करना चाहते हैं. अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर टॉम कॉटन की पहले बयानों से नेतन्याहू का बयान मेल खाता है. इसी समझौते के तहत लीबिया की राजधानी त्रिपोली ने अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह और हमेशा के लिए खत्म कर दिया था.

अमेरिका का ‘लीबिया मॉडल’ क्या है?

अगर ईरान, अमेरिका के लीबिया मॉडल को मान लेता है तो उसे परमाणु कार्यक्रम को खुद से बंद करना होगा. ईरान को अपने संवंर्धित यूरेनियम और हथियारों का पूरी तरह से सरेंडर करना होगा. ईरान को भविष्य में कभी भी फिर से परमाणु कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति नहीं होगी. लीबिया मॉडल के तहत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के द्वारा निरीक्षण की अनुमति होगी. यानी ईरान में परमाणु परीक्षण हो रहा है या नहीं इसको लेकर वहां अंतरराष्ट्रीय संगठन जाकर निरीक्षण कर सकते हैं.

लीबिया मॉडल को मानने पर ईरान को क्या मिलेगा?

अमेरिका के लीबिया मॉडल के मुताबिक, अगर ईरान इसे स्वीकार कर लेता है तो परमाणु कार्यक्रम बंद करने के बदले उसे आर्थिक राहत दी जाएगी. ईरान को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से पूरी तरह छूट रहेगी. यहां हैरान करने वाली बात ये है कि 2003 में लीबिया के नेता गद्दाफी ने अमेरिका की बात मानकर परमाणु कार्यक्रम बंद किया था.परमाणु कार्यक्रम बंद करने के बाद गद्दाफी की हत्या कर दी गई थी. गद्दाफी के करीबियों ने माना परमाणु कार्यक्रम को बंद करना गद्दाफी की गलती थी.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.