NEP 2020: ग्रेजुएशन के बाद अब सीधे करें डिग्री, यूजीसी के पूर्व चेयरमैन ने दी जानकारी
TV9 Bharatvarsh April 18, 2026 04:43 PM

NEP 2020 Reforms: एनईपी 2020 के कार्यान्वयन को पांच साल हो चुके हैं. पूर्व यूजीसी अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने भारतीय उच्च शिक्षा में लाए गए दूरगामी परिवर्तनों पर TV9 भारतवर्ष डिजिटल के सहयोगी प्लेटफॉर्म एजुकेशन9 के साथ डिटेल चर्चा की है, उन्होंने रेखांकित किया कि एनईपी 2020 का कार्यान्वयन एक सतत प्रक्रिया है, जिसे भारत जैसे विविधतापूर्ण और विशाल एजुकेशन सिस्टम वाले देश में धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है. उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों के संस्थानों जिनके पास शिक्षण संसाधन या इंफ्रास्ट्रक्चर है, उन्हें तैयार होने और नीतियों को लागू करने के लिए सहायता और समय देना आवश्यक है. वहीं, जो संस्थान तैयार हैं वो इन सुधारों को तुरंत अपना रहे हैं. स्कूल एजुकेशन में 86 और पिछले तीन-चार सालों में यूजीसी के तहत 45 रेगुलेशन और फ्रेमवर्क लाए गए हैं.

इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को स्वतंत्रता, लचीलापन और अधिक विकल्प प्रदान करना है. एम. जगदीश कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि “वन फिट्स ऑल” समाधान हमारे छात्रों के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि उनकी आकांक्षाएं, वित्तीय और सामाजिक पृष्ठभूमि भिन्न होती हैं. छात्र क्रिटिकल थिंकर्स बनना चाहते हैं, यथास्थिति पर सवाल उठाना चाहते हैं, जोखिम लेना चाहते हैं और टीम में काम करके नई चीजें विकसित करना चाहते हैं, जैसे कि उत्पाद बनाना या स्टार्टअप शुरू करना. एनईपी 2020 का आर्किटेक्चरल रोडमैप इन्हीं आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बनाया गया है.

चार-वर्षीय स्नातक कार्यक्रम

उच्च शिक्षा में एक महत्वपूर्ण सुधार 4-वर्षीय स्नातक कार्यक्रम है. इस कार्यक्रम में छात्रों को यह लचीलापन दिया गया है कि वो तीसरे वर्ष के अंत में डिग्री लेकर बाहर निकल सकते हैं. जो छात्र चौथे वर्ष में पढ़ाई जारी रखते हैं, उन्हें रिसर्च या अप्रेंटिसशिप पर केंद्रित अतिरिक्त ज्ञान और अनुभव मिलता है. यह चौथे वर्ष का अध्ययन छात्रों की दक्षताओं को बढ़ाता है और उन्हें उभरते अवसरों का लाभ उठाने में मदद करता है. इस 4-वर्षीय डिग्री का एक बड़ा लाभ यह है कि इसे पूरा करने वाले छात्र अपनी मास्टर डिग्री पूरी किए बिना सीधे पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश ले सकते हैं. यह सुविधा उन युवा और महत्वाकांक्षी व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो कम उम्र में रिसर्च करना चाहते हैं, जिससे देश को भी लाभ होगा.

मल्टी एंट्री मल्टी एग्जिट प्रणाली

एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार मल्टी एंट्री मल्टी एग्जिट (MEME) प्रणाली है. यह छात्रों को अपनी पढ़ाई के दौरान स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या वित्तीय कठिनाइयों के कारण एक या दो साल का ब्रेक लेने की अनुमति देता है. वर्तमान प्रणाली में ऐसे ब्रेक को अक्सर “विफलता” माना जाता है, लेकिन MEME के तहत छात्र बाद में वापस आकर अपनी शिक्षा जारी रख सकते हैं और उसे पूरा कर सकते हैं. यह छात्रों को सशक्त बनाता है और उन्हें बिना किसी नकारात्मक लेबल के अपनी शैक्षिक यात्रा को पूरा करने का अवसर देता है. ये सभी सुधार भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली को छात्रों की बदलती जरूरतों और वैश्विक मांगों के अनुरूप ढालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.